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भारतीय सभ्यता ने मानव जाति को देवत्व की अवधारणा दी है: राज्यपाल

On: Tuesday, February 11, 2025 4:41 PM

दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय में ‘एकात्म मानववाद के सामाजिक पहलू’ दीनदयाल उपाध्याय की विरासत पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का किया उद्घाटन

टिकारी संवाददाता: भारतीय सभ्यता लगभग 5000 वर्ष पुरानी है और महान भारतीय दार्शनिकों द्वारा दिए गए विचारों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि देश ने मानव जाति को देवत्व की अवधारणा दी है। वास्तव में सदियों पुराने भारतीय दर्शन ने पश्चिमी देशों सहित दुनिया को प्रभावित किया है और यहां तक कि उन्होंने हमारे पुराने ग्रंथों का रूपांतरण कर गहन अध्ययन भी किया है। उक्त बातें राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर), नई दिल्ली द्वारा समर्थित दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के दीनदयाल उपाध्याय एकात्म मानववाद और सामाजिक नीति केंद्र द्वारा आयोजित ‘एकात्म मानववाद के सामाजिक पहलू’ पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में कही। उन्होंने कहा कि भारतीय अवधारणा हमें सभी संस्कृतियों और विविधता का सम्मान करना सिखाती है। विश्व में पांच प्रमुख सभ्यताएं हैं ईरानी, चीनी, रोमन, तुर्क और भारतीय सभ्यताएं, जो अपने-अपने महत्व के लिए जानी जाती हैं। भारतीय सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह ज्ञान और बुद्धि के प्रचार के लिए जानी जाती है। इसलिए हमें अपने प्राचीन शास्त्रों में मानवता का वास्तविक अर्थ खोजने की आवश्यकता है और पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने पहली बार राजनीतिक क्षेत्र में इस अवधारणा का प्रयोग किया था।

अपने व्याख्यान के दौरान राज्यपाल ने भगवद गीता, वेदों के श्लोकों और शंकराचार्य, स्वामी विवेकानंद और भारत के अन्य महान दार्शनिकों के कथनों को उद्धृत किया। उन्होंने अपने भाषण का समापन करते हुए कहा कि हमारे संविधान निर्माता प्रस्तावना में इतने सारे बिंदुओं को रखने के बजाय ‘एकात्म मानववाद’ शब्द का प्रयोग कर सकते थे जो विविधतापूर्ण और विशाल देश भारत के लिए बहुत उपयुक्त है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष डा. राम माधव ने कहा कि भारत निसंदेह एक महान देश है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर महान विचारकों को पैदा न करने के लिए हमारी आलोचना की जाती है। मेरे लिए पिछली सदी में देश ने दो महान् मौलिक विचारकों को जन्म दिया। एक महात्मा गांधी और दूसरे पंडित दीनदयाल उपाध्याय। लेकिन भारत में हम अपनी जड़ों की ओर ध्यान देने के बजाय पश्चिमी दर्शन से ज्यादा प्रभावित हैं। इसलिए दुनिया हमारी आलोचना करती है।

लंदन में एक प्रतिभागी द्वारा भारत को गुलाम देश मानने की धारणा पर सवाल उठाने पर दिए गए स्वामी विवेकानंद के बयान को उद्धृत करते हुए डा. माधव ने कहा कि हमारे लोग सुस्त हैं। इसलिए हम खुद को बेहतर स्थिति में नहीं रख पाए। इससे पहले सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने अपने स्वागत भाषण में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने के लिए आभार व्यक्त किया। प्रो. सिंह ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय द्वारा दिए गए एकात्म मानववाद के दर्शन से भारत विश्व गुरु बन सकता है और विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल कर सकता है। धन्यवाद ज्ञापन इंडिया फाउंडेशन के विशिष्ट फेलो डा. सोनू त्रिवेदी ने किया तथा उद्घाटन सत्र का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। 

पीआरओ मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि आगे सत्रों में डा. विनय सहस्रबुद्धे, पूर्व सांसद (राज्यसभा), प्रो. सुनैना सिंह, पूर्व कुलपति, नालंदा अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, प्रो. क्लाउड विष्णु स्पाक, विभागाध्यक्ष, दर्शनशास्त्र, सोरबोन विश्वविद्यालय, अबू धाबी, प्रो. वंदना मिश्रा, जेएनयू, डा. गुरु प्रकाश पासवान, सहायक प्रोफेसर, पटना विश्वविद्यालय, प्रो. प्रणव कुमार, डीन, सीयूएसबी ने पस्तुत विषय पर अपने विचार रखे। सेंटर के कॉर्डिनेटर और सेमिनार के संयोजक डा. सुधांशु कुमार झा एवं को-कॉर्डिनेटर डा. रोहित कुमार ने बताया कि समानांतर सत्र में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन युवा विद्वानों ने अपने शोध पत्र भी प्रस्तुत किए। दूसरे दिन, विशेषज्ञ व्याख्यान देंगे और सम्मेलन के विषय पर शोधकर्ताओं द्वारा शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।

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