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सरकारी जमीन पर अवैध जमाबंदी का खेल: गया जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने गुरुआ CO पर लगाया ₹5000 का जुर्माना

On: Thursday, January 8, 2026 3:06 PM

गया। बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत एक महत्वपूर्ण फैसले में, गया के जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, आदित्य कुमार पीयूष ने सरकारी भूमि (गैरमजरूआ मालिक) के अवैध हस्तांतरण और उस पर कायम की गई संदिग्ध जमाबंदी को लेकर कड़ा आदेश पारित किया है। मामले में लापरवाही बरतने और स्पष्टीकरण न देने पर लोक प्राधिकार-सह-अंचलाधिकारी, गुरुआ के विरुद्ध 5000 रुपये का अर्थदंड (शास्ति) अधिरोपित करने की अनुशंसा की गई है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद गुरुआ अंचल के ग्राम फतुआचक (मौजा रामनगर) से जुड़ा है। परिवादी राजदेव शर्मा ने शिकायत दर्ज कराई थी कि खाता संख्या-44, प्लॉट संख्या-112, जो राजस्व अभिलेखों में ‘गैरमजरूआ मालिक’ (सरकारी प्रकृति) की भूमि है, उसे कुछ व्यक्तियों द्वारा अवैध रूप से केवाला (बिक्री) करा लिया गया है और उस पर अवैध कब्जा कर रास्ता बाधित करने का प्रयास किया जा रहा है।
अनुमंडलीय स्तर से राहत न मिलने पर अपीलकर्ता ने जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के पास प्रथम अपील दायर की थी।

जांच में खुली प्रशासन की पोल

सुनवाई के दौरान अंचलाधिकारी, गुरुआ द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में स्वीकार किया गया कि संबंधित भूमि खाता संख्या-44, खेसरा-112 ‘गैरमजरूआ मालिक’ खाते की है। इसके बावजूद, प्रतिवादी रामवृक्ष मिस्त्री और सीताराम मिस्त्री के नाम से जमाबंदी संख्या 122/1, 403/3 और 49/1 संचालित हो रही है और लगान रसीदें भी काटी जा रही हैं।

अधिकारी की तीखी टिप्पणी: ‘घोर प्रशासनिक लापरवाही’

आदित्य कुमार पीयूष ने सुनवाई के दौरान पाया कि सुखलाल भुइयां और जीतु भुइयां नामक व्यक्तियों ने इस सरकारी जमीन को निजी व्यक्तियों को बेच दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जमीन सरकारी थी, तो इन व्यक्तियों को इसे बेचने का अधिकार किसने दिया?
आदेश में कहा गया कि “गैरमजरूआ मालिक भूमि पर जमाबंदी का कायम होना गंभीर विधिक अनियमितता, कर्तव्यहीनता और संदेहास्पद प्रशासनिक लापरवाही का द्योतक है। बार-बार निर्देश के बावजूद अंचलाधिकारी यह स्पष्ट नहीं कर सके कि किस सक्षम आदेश के आधार पर यह जमाबंदी कायम की गई।”

CO पर कार्रवाई और भविष्य के निर्देश

  • अदालत ने लोक प्राधिकार (CO, गुरुआ) द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में बरती गई शिथिलता को ‘निंदनीय’ माना। फैसले के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
  • शास्ति: अधिनियम की धारा-8 के तहत CO गुरुआ पर 5000 रुपये का जुर्माना लगाने की अनुशंसा।
  • जमाबंदी रद्दीकरण: अंचलाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे अवैध पाई जाने वाली जमाबंदी को तत्काल रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करें।
  • दोषियों पर कार्रवाई: भू-माफियाओं और इस खेल में शामिल राजस्व कर्मियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ विधि-सम्मत कार्रवाई करने का आदेश।
  • भूमि सुरक्षा: गैरमजरूआ मालिक खाते की भूमि की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी तय की गई है।

इस फैसले से भू-माफियाओं और राजस्व विभाग के उन कर्मियों में हड़कंप है जो सांठगांठ कर सरकारी जमीनों की बंदरबांट करते हैं। जिला प्रशासन के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि सार्वजनिक संपत्तियों के साथ खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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