मगध लाइव न्यूज़ डेस्क | गया
दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUSB), गया में सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को पंचम दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में बिहार के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान बताते हुए विद्यार्थियों को ज्ञान, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। समारोह में स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी के कुल 1,662 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जबकि उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले 61 विद्यार्थियों को कुल 95 स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया।
गुरु-शिष्य संबंध भारतीय परंपरा का अहम हिस्सा: राज्यपाल
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने कहा कि गुरु एवं शिष्य का संबंध भारतीय परंपरा का अहम हिस्सा है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि पढ़ाई पूरी किए हुए उन्हें 50 वर्ष से अधिक समय हो चुका है, लेकिन आज भी वे अपने गुरुओं का उतना ही सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि आज भी जब किसी गुरु का व्हाट्सएप संदेश आता है तो वे उसे सबसे पहले पढ़ते हैं।
राज्यपाल ने उपाधि और स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों तथा उनके शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि इस सफलता का श्रेय विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके शिक्षकों को भी जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी उपलब्धियों की खुशियां दूसरों के साथ बांटने की अपील की। राज्यपाल ने कहा कि खुशियां और ज्ञान बांटने से बढ़ते हैं। उन्होंने CUSB के नैक A++ ग्रेड, UGC कैटेगरी-1 का दर्जा और स्वच्छ एवं हरित परिसर की सराहना करते हुए विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को सराहनीय बताया।
उन्होंने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC), पटना की ओर से नवस्थापित 211 डिग्री महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों के कुल 2,400 पदों के लिए हुई नियुक्तियों में CUSB के 80 विद्यार्थियों का चयन होना विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता को दर्शाता है। राज्यपाल ने कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह से बिहार सरकार के जनजागरूकता अभियानों में सक्रिय भागीदारी करने का आग्रह किया। विशेष रूप से उन्होंने ‘टीबी मुक्त बिहार’ अभियान में विश्वविद्यालय की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण: विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार

समारोह में बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने विद्यार्थियों और शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे जिस भी क्षेत्र में अपना करियर बनाएं, मानवता के संरक्षण और सामाजिक उन्नति के लिए अपना योगदान अवश्य दें। उन्होंने कहा कि समाज के जिम्मेदार नागरिक के रूप में विद्यार्थियों को सामाजिक हितों से कभी समझौता नहीं करना चाहिए।
उन्होंने युवाओं से अहिंसक विरोध, मानव सम्मान, संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति अटूट विश्वास बनाए रखने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करने के साथ-साथ दूसरों के विचारों और दृष्टिकोण को भी महत्व देना चाहिए।
नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनें युवा: केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी
केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री जीतनराम मांझी ने अपने संबोधन में कहा कि देश की संस्कृति, सभ्यता और ज्ञान संपदा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी आज के युवाओं के कंधों पर है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की सोच में बड़ा बदलाव आया है। अब युवा केवल नौकरी पाने की इच्छा नहीं रखते, बल्कि उद्यमशीलता के माध्यम से रोजगार सृजन करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि युवाओं की यही आत्मनिर्भर सोच भारत को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने महात्मा गांधी और बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के आत्मनिर्भरता संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को नवाचार, स्वरोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
CUSB ने बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर दिलाई नई पहचान: गंगा प्रसाद
सिक्किम एवं मेघालय के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि भारत आज आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस लक्ष्य को हासिल करने में उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध संबंधी उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है तथा बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
कुलपति ने गिनाईं विश्वविद्यालय की उपलब्धियां, NEP-2020 के क्रियान्वयन पर दिया जोर
CUSB के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने महामहिम राज्यपाल, विशिष्ट अतिथियों, कार्यकारी समिति, अकादमिक समिति के सदस्यों एवं अन्य गणमान्य लोगों का स्वागत और आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की वार्षिक उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की।
कुलपति ने कहा कि कम समय में ही विश्वविद्यालय ने शिक्षा और शोध के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के सफल क्रियान्वयन में विश्वविद्यालय अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यहां बहुविषयक शिक्षा, कौशल विकास और अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट की व्यवस्था लागू की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में उच्चस्तरीय अनुसंधान कार्य जारी हैं। संकाय सदस्यों ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित शोध पत्र प्रकाशित करने के साथ पेटेंट भी हासिल किए हैं। विश्वविद्यालय का परिसर हरित, पर्यावरण अनुकूल और आधुनिक डिजिटल सुविधाओं से सुसज्जित है।
61 विद्यार्थियों को मिले 95 गोल्ड मेडल, पहली बार आठ प्रायोजित स्वर्ण पदकों का वितरण

पंचम दीक्षांत समारोह का सबसे खास आकर्षण मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान रहा। राज्यपाल ने मंच पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को डिग्री के साथ कुलाधिपति स्वर्ण पदक, संकाय स्वर्ण पदक और विभागीय स्वर्ण पदक प्रदान किए। समारोह के दौरान वर्ष 2023 और 2024 के शैक्षणिक सत्रों के लिए कुल 61 विद्यार्थियों को 95 स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया।
वर्ष 2023 के लिए दो विद्यार्थियों को कुलाधिपति स्वर्ण पदक, 11 विद्यार्थियों को संकाय स्वर्ण पदक और 29 विद्यार्थियों को विभागीय स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। वहीं वर्ष 2024 के लिए दो विद्यार्थियों को कुलाधिपति स्वर्ण पदक, 11 विद्यार्थियों को संकाय स्वर्ण पदक और 32 विद्यार्थियों को विभागीय स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
इस वर्ष पहली बार आठ विद्यार्थियों को प्रायोजित स्वर्ण पदक भी प्रदान किए गए। इनमें डॉ. मंजू करण स्मृति चिह्न, शेओधारी स्मारक स्वर्ण पदक, श्री विश्वनाथ डालमिया स्मारक स्वर्ण पदक, आनंदी देवी डालमिया स्मारक स्वर्ण पदक, कमला देवी स्मारक स्वर्ण पदक और डॉ. बिंदेश्वर पाठक स्वर्ण पदक शामिल रहे।
1662 विद्यार्थियों के लिए यादगार बना दीक्षांत समारोह

पंचम दीक्षांत समारोह में स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG) और पीएचडी पाठ्यक्रमों के कुल 1,662 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। यह अवसर विद्यार्थियों के लिए उनकी वर्षों की मेहनत, लगन और शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव बना।
कार्यक्रम के दौरान परीक्षा नियंत्रक डॉ. शांतिगोपाल पाइन ने मेडल वितरण से संबंधित औपचारिक घोषणाएं कीं। कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जबकि लाइफ साइंस विभाग की डॉ. अमृता श्रीवास्तव ने मंच संचालन की जिम्मेदारी निभाई।
समारोह में वक्ताओं ने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि विश्वविद्यालय से प्राप्त डिग्री केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति नई जिम्मेदारी की शुरुआत है। ज्ञान, कौशल, नवाचार और मानवीय मूल्यों के साथ आगे बढ़कर युवा भारत को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।






