मगध लाइव न्यूज़ डेस्क | बाराचट्टी (गया)
गया जिले के बाराचट्टी प्रखंड की 13 पंचायतों में सरकारी स्तर पर लगाई गई सोलर लाइटों की स्थिति चिंताजनक है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, प्रखंड में कुल 1,750 सोलर लाइटें लगाई गई हैं, जिनमें से 299 खराब पड़ी हैं। यानी करीब 17.1 प्रतिशत लाइटें काम नहीं कर रही हैं। सबसे खराब स्थिति भलुआ पंचायत की है, जहां कुल 60 सोलर लाइटों में से 30 बंद हैं। वहीं, काहुदाग पंचायत में सबसे अधिक 50 लाइटें खराब बताई गई हैं। इस खुलासे ने ग्रामीण इलाकों में सोलर लाइटों के रखरखाव और मरम्मत व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
RTI से सामने आई पंचायतवार सोलर लाइटों की स्थिति
यह जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता सह पत्रकार राहुल नयन की ओर से मांगी गई सूचना के जवाब में सामने आई है। बाराचट्टी प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) कार्यालय ने 14 अक्टूबर 2026 को पत्र जारी कर प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी के माध्यम से पंचायतवार रिपोर्ट उपलब्ध कराई। रिपोर्ट के अनुसार, प्रखंड की 13 पंचायतों में कुल 1,451 सोलर लाइटें चालू हैं, जबकि 299 लाइटें खराब बताई गई हैं।
काहुदाग में सबसे अधिक 50, भलुआ में आधी लाइटें बंद
पंचायतवार आंकड़ों पर नजर डालें तो काहुदाग में 140 में से 50 सोलर लाइटें खराब हैं। भलुआ में 60 में से 30, झाझ में 150 में से 30 और पतलुका में 150 में से 28 लाइटें काम नहीं कर रही हैं। सरवा और बिंदा पंचायत में 26-26, जबकि बजरकर में 22 सोलर लाइटें खराब पाई गई हैं।
इसके अलावा जयगीर पंचायत में 110 में से 21, बीबीपेसरा में 140 में से 18, रोही में 140 में से 16, दिवनिया में 140 में से 14, बारा में 130 में से 10 और बूमेर में 140 में से छह सोलर लाइटें खराब बताई गई हैं। आंकड़े बताते हैं कि खराब लाइटों की समस्या केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रखंड की कई पंचायतों में यह स्थिति बनी हुई है।
मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी?
ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर लाइटें लगाने का मुख्य उद्देश्य गलियों, सार्वजनिक स्थलों और गांव के रास्तों को रात में रोशन करना है। खासकर उन इलाकों में इनकी उपयोगिता अधिक है, जहां नियमित बिजली आपूर्ति की समस्या रहती है। ऐसे में बड़ी संख्या में सोलर लाइटों का खराब रहना ग्रामीणों को मिलने वाली सार्वजनिक सुविधा को प्रभावित कर सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि खराब पड़ी इन लाइटों की मरम्मत अब तक क्यों नहीं कराई गई? ये लाइटें कितने समय से बंद हैं और इनके रखरखाव के लिए जिम्मेदार एजेंसी या विभाग ने क्या कदम उठाए हैं? साथ ही, सोलर लाइटों की स्थापना, मरम्मत और रखरखाव पर अब तक कितनी राशि खर्च की गई है, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक होना जरूरी है।
हालांकि, आरटीआई से प्राप्त रिपोर्ट में केवल चालू और खराब लाइटों की संख्या का विवरण दिया गया है। इन आंकड़ों के आधार पर किसी वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए संबंधित अभिलेखों, मरम्मत कार्यों और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच आवश्यक होगी।
अब विभागीय कार्रवाई का इंतजार
आरटीआई के जरिए पंचायतवार स्थिति सामने आने के बाद अब संबंधित विभाग और पंचायत प्रशासन की जिम्मेदारी है कि खराब सोलर लाइटों का भौतिक सत्यापन कराए और उनकी मरम्मत के लिए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करे। ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं के तहत उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब उनकी नियमित निगरानी और रखरखाव भी किया जाएगा।







