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जम्हेता में गूंजा बाबा साहेब का अमर संदेश: शिक्षा के संकल्प के साथ मनाई गई डॉ. अंबेडकर की 135वीं जयंती

On: Tuesday, April 14, 2026 6:01 PM

जम्हेता (बिहार): कलम के सिपाही जब समाज के शिल्पकार को याद करते हैं, तो संकल्पों की गूंज और गहरी हो जाती है। कुछ ऐसा ही नजारा आज 14 अप्रैल 2026 को के.पी.आर. जम्हेता में देखने को मिला, जहाँ बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ के तत्वावधान में संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती पूरे गौरव और उल्लास के साथ मनाई गई। प्रखंड अध्यक्ष रविशंकर कुमार की अगुवाई में जुटे शिक्षकों और ग्रामीणों ने न केवल बाबा साहेब को पुष्पांजलि अर्पित की, बल्कि उनके संघर्षों को अपने जीवन के आचरण में उतारने का संकल्प भी दोहराया।

समारोह की शुरुआत एक भावुक क्षण के साथ हुई जब उपस्थित जनसमूह ने बाबा साहेब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने उनके जीवन दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि बाबा साहेब का जीवन विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने की प्रेरणा देता है। सभा में जब बाबा साहेब का वह अमर उद्घोष गूंजा कि “शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पियेगा वह दहाड़ेगा”, तो पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से भर उठा। शिक्षकों ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि वह अनमोल पूंजी है जो समाज के अंतिम व्यक्ति को भी सशक्त बनाती है।

इस गरिमामयी सभा में शिक्षा जगत के कई प्रबुद्ध चेहरे शामिल हुए। मध्य विद्यालय गुरीसर्वे के शिक्षक संजय कुमार और धरहराकलां उच्च विद्यालय के राकेश रंजन ने बाबा साहेब के शैक्षिक विजन को आज के संदर्भ में प्रासंगिक बताया। संघ के सचिव राजकुमार पासवान, उपाध्यक्ष प्रमोद जी और महासचिव संजय कुमार प्रियदर्शी ने भी अपने विचार साझा करते हुए सामाजिक समरसता की बात कही। इसके साथ ही अमरदीप कुमार, चितरंजन, जितेंद्र प्रसाद, गणेश प्रसाद और अजय कुमार जैसे समर्पित शिक्षकों ने कार्यक्रम में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाकर इसे सफल बनाया।

कार्यक्रम की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें न केवल शिक्षक, बल्कि बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण भी शामिल हुए। अनुमंडल अध्यक्ष अमिताभ सुमन ने अपने प्रभावी मंच संचालन से पूरे कार्यक्रम में ऊर्जा बनाए रखी। आयोजन के समापन पर प्रखंड अध्यक्ष रविशंकर कुमार ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बाबा साहेब के विचारों को घर-घर तक पहुँचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि शिक्षा और समानता की जो मशाल बाबा साहेब ने जलाई थी, उसे आज की पीढ़ी पूरी मजबूती के साथ थामे हुए है।

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