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गया: रमजान के चांद का दीदार होते ही मस्जिदों में बढ़ी रौनक, इबादत और अकीदत के साथ पाक महीने का इस्तकबाल

On: Thursday, February 19, 2026 3:46 AM

गया | संवाददाता बुधवार की शाम आसमान में जैसे ही रमजान का मुबारक चांद नजर आया, गया शहर समेत पूरे जिले में खुशी की लहर दौड़ गई। ‘रमजान मुबारक’ की दुआओं और बधाइयों के साथ रोजेदारों ने इस्लाम के इस सबसे पवित्र महीने का गर्मजोशी से इस्तकबाल किया। ऐतिहासिक जामा मस्जिद से लेकर मोहल्लों की छोटी मस्जिदों तक, हर तरफ रौनक देखते ही बन रही है।

कुरान के नजूल का महीना है रमजान

इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, रमजान का महीना तमाम महीनों में सबसे अफजल (श्रेष्ठ) माना जाता है। धार्मिक जानकारों का कहना है कि इसी मुकद्दस महीने में अल्लाह ने इंसानियत की रहनुमाई के लिए अपनी आखिरी किताब ‘कुराने पाक’ को पैगंबर मोहम्मद साहब पर नाजिल (अवतरित) किया था। अल्लाह ने इस महीने को खास तौर पर अपना महीना बताया है, जिसमें इबादत का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।

मस्जिदों में मुकम्मल हुई तैयारियां

चांद रात की तस्दीक होते ही गया के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की मस्जिदों में विशेष इंतजाम किए गए हैं। लाइट, बिजली और वजू के लिए पानी की मुकम्मल व्यवस्था की गई है ताकि तपती गर्मी के बावजूद नमाजियों और इबादत गुजारों को किसी तरह की दुश्वारी न हो।
स्थानीय उलेमाओं के अनुसार:

“चांद नजर आते ही मोमिनों के दिलों में एक अलग उत्साह पैदा हो जाता है। आम दिनों की तुलना में मस्जिदों में नमाजियों की तादाद काफी बढ़ जाती है। रोजेदार सहरी के बाद दिन भर भूखे-प्यासे रहकर अपने रब की रजा के लिए इबादत करते हैं।”

तरावीह की नमाज से गूंजी मस्जिदें

रमजान की पहली रात से ही मस्जिदों में विशेष ‘तरावीह’ की नमाज शुरू हो गई है, जिसमें 20 रकात नमाज के दौरान कुरान का पाठ किया जाता है। पूरे एक महीने तक चलने वाले इस कठिन व्रत (रोजा) के दौरान गया के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में देर रात तक चहल-पहल देखी जा रही है। लोग नमाज, तिलावत और दुआओं के जरिए अपने गुनाहों की माफी मांग रहे हैं और मुल्क में अमन-चैन की दुआएं कर रहे हैं।

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