मगध लाइव न्यूज़ डेस्क
पंडित दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) जंक्शन पर शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब प्लेटफॉर्म संख्या 8 पर दानापुर-पुणे विशेष गाड़ी (01450) के बेपटरी होने की सूचना प्रसारित हुई। घटना की गंभीरता को देखते हुए तुरंत सायरन बजाए गए और रेलवे के आपदा प्रबंधन विभाग सहित राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीमें घटनास्थल की ओर दौड़ पड़ीं। दरअसल, यह कोई वास्तविक रेल दुर्घटना नहीं थी, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए डीडीयू मंडल द्वारा आयोजित एक व्यापक मेगा मॉकड्रिल थी। मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) उदय सिंह मीना की सीधी निगरानी में आयोजित इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य किसी भी संभावित रेल हादसे के समय त्वरित राहत, बचाव और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था।

सायरन बजते ही एक्शन में आईं राहत और बचाव की टीमें स्टेशन अधीक्षक द्वारा ठीक 12:04 बजे इस काल्पनिक दुर्घटना की सूचना फ्लैश की गई, जिसमें एक यात्री कोच के पटरी से उतरने की स्थिति दर्शाई गई थी। सायरन बजते ही डीडीयू और गया से दुर्घटना राहत चिकित्सा यान, क्रेन और अन्य आपातकालीन संसाधनों को तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। इस पूरी प्रक्रिया को इतनी सटीकता से अंजाम दिया गया मानों कोई वास्तविक चुनौती सामने हो। घटना की परिकल्पना में 10 यात्रियों की मौत और 5 के घायल होने का दृश्य बनाया गया था, ताकि चिकित्सा और बचाव दल विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी खुद को साबित कर सकें। घायलों को तुरंत स्ट्रेचर के जरिए चिकित्सा शिविर तक पहुँचाकर प्राथमिक उपचार देने की प्रक्रिया का सजीव अभ्यास किया गया।

एनडीआरएफ जवानों और रेलवे कर्मचारियों का दिखा अद्भुत समन्वय बचाव अभियान के दौरान एनडीआरएफ की 11वीं बटालियन के जवानों ने कटर की मदद से दुर्घटनाग्रस्त कोच के हिस्से काटकर अंदर फंसे डमी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस महा-अभ्यास में एनडीआरएफ के 60 जवान, 20 स्काउट्स एवं गाइड्स, राज्य पुलिस, नागरिक सुरक्षा, अग्निशमन सेवा और रेलवे के 100 से अधिक आपदा प्रबंधन कर्मचारियों ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। मौके पर मौजूद डिप्टी सीएमओ डॉ. प्रेम प्रकाश उपाध्याय, एनडीआरएफ कमांडेंट आशीष सिंह चौहान और मास्टर ट्रेनर प्रवीर यादवेंदु के मार्गदर्शन में टीमों ने यह साबित किया कि संकट की घड़ी में किस तरह एक-एक सेकंड कीमती होता है और उसे कैसे उपयोग में लाना है।

सुरक्षा और तत्परता परखने के लिए डीआरएम का कड़ा निर्देश इस पूरी प्रक्रिया का बारीकी से अवलोकन करते हुए डीआरएम उदय सिंह मीना ने मौके पर मौजूद अधिकारियों के साथ राहत और चिकित्सा व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के संयुक्त अभ्यास भविष्य की किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए मील का पत्थर साबित होते हैं। इस मॉकड्रिल के जरिए न सिर्फ तकनीकी खामियों को पहचानने का मौका मिला, बल्कि संरक्षा, परिचालन, यांत्रिक, विद्युत, और आरपीएफ जैसे तमाम विभागों की एकजुटता भी प्रमाणित हुई। अंत में अधिकारियों द्वारा यह सुनिश्चित किया गया कि जनहानि से जुड़ी तमाम सूचनाएं केवल अभ्यास का हिस्सा थीं, और असल में कोई हादसा नहीं हुआ है।








