मगध लाइव न्यूज़ डेस्क | गयाजी
विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले के दौरान मोक्षधाम गयाजी में आस्था और धर्म का अनुपम संगम देखने को मिल रहा है। इसी पवित्र वातावरण में गांधी जयंती के अवसर पर 6 बिहार बटालियन एनसीसी, गयाजी द्वारा फल्गु नदी तट पर एक विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत के सपनों को साकार करने और ‘पुनीत सागर अभियान’ के तहत एनसीसी कैडेटों ने फल्गु नदी के प्रमुख घाटों, तटीय क्षेत्रों और श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले मार्गों पर व्यापक सफाई अभियान चलाया। इस दौरान कैडेटों ने श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हुए अपनी नैतिक जिम्मेदारियों का अहसास कराया।

प्लास्टिक मुक्त फल्गु और कचरा प्रबंधन पर जोर
सफाई अभियान के दौरान एनसीसी कैडेटों ने नदी तट और घाटों पर फैले प्लास्टिक, पॉलीथिन, बासी फूल और अन्य कचरे को एकत्र कर उनका सुरक्षित निपटान किया। कैडेटों ने घाटों पर मौजूद तीर्थयात्रियों और स्थानीय दुकानदारों से बातचीत की और ‘मेरा कचरा, मेरी जिम्मेदारी’ का प्रभावशाली संदेश दिया। उन्होंने अपील की कि मोक्षदायिनी फल्गु नदी की पवित्रता को बनाए रखना हम सभी का सामूहिक कर्तव्य है, इसलिए पूजा-सामग्री या प्लास्टिक कचरा सीधे नदी में बहाने से बचें और कचरे को निर्धारित डस्टबिन में ही डालें।

स्वच्छता हमारी आदत और जिम्मेदारी का हिस्सा: कर्नल पंकज
अभियान का नेतृत्व कर रहे 6 बिहार बटालियन एनसीसी के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल पंकज कुमार, कीर्ति चक्र ने कैडेटों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि स्वच्छता सिर्फ एक दिन का प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसे दैनिक आदत और सामाजिक दायित्व के रूप में स्वीकार करना होगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह हम अपने घरों को साफ और सुंदर रखते हैं, उसी तरह फल्गु नदी जैसे पवित्र जल स्रोतों की स्वच्छता भी हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। एनसीसी कैडेट्स न केवल आज समाज में सकारात्मक बदलाव के वाहक बन रहे हैं, बल्कि देश के जिम्मेदार और संवेदनशील भविष्य का निर्माण भी कर रहे हैं।
श्रद्धालुओं ने मिलाया हाथ, बनी जनभागीदारी की मिसाल
अनुशासित वर्दी में कैडेटों को पूरी लगन के साथ फल्गु तट पर सफाई करते देख वहां मौजूद देश-विदेश के कई श्रद्धालु भी खुद को रोक नहीं सके। तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों ने आगे बढ़कर सफाई कार्य में हाथ बंटाया, जिससे यह सरकारी या संस्थागत कार्यक्रम न रहकर एक जीवंत जन-आंदोलन में बदल गया। मोक्षधाम की इस धरती से एक बेहद स्पष्ट और सशक्त संदेश निकला कि पिंडदान और धार्मिक अनुष्ठानों से जहां पितरों को शांति मिलती है, वहीं नदी और पर्यावरण की स्वच्छता से आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और सुंदर भविष्य हासिल होता है।







