मगध लाइव न्यूज़ डेस्क | गया
विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष महासंगम-2026 के पावन अवसर पर गयाजी की धरती से आध्यात्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। जिला प्रशासन और वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चलाए जा रहे “पितृवाटिका – एक पेड़ पूर्वजों के नाम” अभियान के तहत खटकाचक स्थित निर्धारित स्थल पर गरिमामय पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने के साथ-साथ प्रकृति के प्रति अपने दायित्व को निभाने की दिशा में एक सशक्त और अनुकरणीय संदेश दिया गया है।
श्रद्धा और पर्यावरण का अनूठा संगम

पौधारोपण अभियान के दौरान पितृवाटिका परिसर में कुल 41 फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण किया गया। यह पहल पितृपक्ष के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को हरित संरक्षण के वैश्विक संदेश से जोड़ने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम है। गया धाम आने वाले तीर्थयात्री अक्सर अपने पूर्वजों की आत्मशांति के लिए पिंडदान और तर्पण करते हैं, लेकिन इस अभियान के जरिए उनकी स्मृतियों को पर्यावरण सुरक्षा का रूप देकर हमेशा के लिए जीवित रखने की एक नई परंपरा का सूत्रपात हुआ है।
आने वाली पीढ़ियों के लिए हरी-भरी सौगात

“एक पेड़ पूर्वजों के नाम” की भावना के साथ रोपे गए ये पौधे भविष्य में न केवल गया की आबोहवा को शुद्ध करेंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और हरियाली के महत्व का बोध भी कराएंगे। पितृवाटिका का मूल उद्देश्य धार्मिक श्रद्धा को सीधे प्रकृति संरक्षण से जोड़ना है, ताकि देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक पौधारोपण के प्रति जागरूक हों और अपनी पारिवारिक परंपराओं को हरियाली के साथ समृद्ध कर सकें।
जिला प्रशासन की श्रद्धालुओं से भावुक अपील
कार्यक्रम के समापन पर गया जिला प्रशासन ने आम नागरिकों एवं दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं से अपने-अपने पूर्वजों की स्मृति में कम से कम एक पौधा लगाने की भावुक अपील की। प्रशासन ने जोर देकर कहा कि सिर्फ पौधा लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके संवर्धन और संरक्षण की जिम्मेदारी उठाना भी उतना ही आवश्यक है। पितृपक्ष की पौराणिक परंपरा को पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ जोड़ने का यह सार्थक प्रयास निश्चित रूप से मगध क्षेत्र को एक नया हरित आवरण प्रदान करेगा।







