विशेष रिपोर्ट: रूपक सिन्हा
मोक्ष की पावन भूमि गया जी में आगामी 26 सितंबर 2026 से विश्वप्रसिद्ध पितृपक्ष मेले का भव्य आगाज होने जा रहा है। इस वर्ष का मेला आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बेहद खास होने वाला है, क्योंकि अपने मृत पूर्वजों, मित्रों और परिजनों की आत्मा की शांति के लिए सात समंदर पार से भी विदेशी श्रद्धालुओं का जत्था गया जी पधार रहा है। सनातन धर्म और गया जी के पिंडदान की अलौकिक महत्ता से गहरे प्रभावित होकर 50 से अधिक विदेशी नागरिक मोक्षदायिनी फल्गु के तट पर पूरे विधि-विधान के साथ अपने पितरों का तर्पण और पिंडदान करेंगे।
सनातन आस्था: भारतीय परिधान और निर्जला व्रत का संकल्प
यह विदेशी जत्था सनातन धर्मी लोकनाथ गौड़ के नेतृत्व में गया जी पहुंच रहा है। लोकनाथ गौड़ ने जानकारी दी है कि पूर्व के वर्षों में यहां आकर कर्मकांड कर चुके विदेशियों की आध्यात्मिक अनुभूति से प्रेरित होकर इन नए श्रद्धालुओं ने भी पिंडदान करने की ठानी है। सबसे बड़ी बात यह है कि ये सभी विदेशी नागरिक पूरी तरह से भारतीय वेशभूषा धारण कर और सनातन परंपरा का निर्वहन करते हुए निर्जला (बिना जल ग्रहण किए) रहकर पिंडदान का कर्म पूरा करेंगे। अलग-अलग तिथियों में पधारने वाले इस विदेशी जत्थे में बुजुर्ग महिलाओं से लेकर कई युवा भी पूरे उत्साह और आस्था के साथ शामिल हो रहे हैं।
रूस, जर्मनी, इटली से लेकर अफ्रीका तक के श्रद्धालु शामिल

इस बार के पितृपक्ष मेले में मुख्य रूप से रूस, यूक्रेन, जर्मनी, इटली, लातविया और अफ्रीकी देश घाना से श्रद्धालु अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। जिन विदेशी यात्रियों ने गया जी आने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है, उनमें रूस की 68 वर्षीय ब्रिनेवा, दूरसुनोवा, रेडियोलगा, पावलोवा, बुरीवाओकसाना और सिफ्टेसिफायना शामिल हैं। वहीं जर्मनी से स्वेतलाना (जो पूर्व में भी गया जी आ चुकी हैं), थुन, सच्चवाब लिडिया और कोचनाटालिए पधार रही हैं। इसके अलावा इटली से बोराच्ची मस्सीमो, यूक्रेन से खोमेवको ओइकसान्द्रा और घाना (अफ्रीका) से माइकल मनसो तथा असमोह जैसे दर्जनों नाम इस सूची में दर्ज हैं। इतनी बड़ी संख्या में विदेशी श्रद्धालुओं का आगमन गया जी के वैश्विक महत्व को और भी सुदृढ़ कर रहा है।






