मगध लाइव न्यूज़ डेस्क | गया
झारखंड, बिहार समेत देश के 11 राज्यों में सैकड़ों आम लोगों को वाहन, फ्लैट और घरेलू सामानों पर भारी सब्सिडी दिलाने का झांसा देकर 150 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने वाले ‘राधास्वामी संगठन’ के कथित मास्टरमाइंड का असली चेहरा बेनकाब हो गया है। इस महाठगी के नेटवर्क का मुख्य आरोपी 28 वर्षीय दीपक कुमार शर्मा गया जिले के कोंच थाना क्षेत्र अंतर्गत गरारी पंचायत के औहालचक गांव का मूल निवासी है। कभी सूरत में अपने परिवार के साथ दिहाड़ी मजदूरी करने वाला दीपक आज ठगी के करोड़ों रुपयों के दम पर अरबों की अकूत संपत्ति का मालिक बन चुका है और फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
फर्श से अर्श तक: सूरत के मजदूर से अरबपति बनने की कहानी
ठगी के इस सरगना के फर्श से अर्श तक पहुंचने की कहानी बेहद हैरान करने वाली है। दीपक के पिता विमल कुमार शर्मा अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए करीब तीन दशक पहले रोजगार की तलाश में गुजरात के सूरत शहर चले गए थे, जहां वे अपने पारंपरिक बढ़ई (कारपेंटर) के काम से जुड़ गए। दीपक का जन्म भी सूरत में ही हुआ था और वह भी अपने परिवार के साथ मजदूरी के कार्यों में हाथ बंटाता था। करीब 10 साल पहले यह परिवार सूरत से वापस बिहार लौटकर पटना में बस गया, जिसके बाद दीपक ने अपराध की एक नई दुनिया में कदम रखा।
धार्मिक नाम का सहारा और 50 हजार एजेंटों का नेटवर्क
दीपक ने सबसे पहले पटना में राधास्वामी संगठन का सेंटर खोला और खुद को एक समाजसेवी के रूप में पेश किया। आम लोगों का आसानी से विश्वास जीतने के लिए उसने शातिर तरीके से अपने एनजीओ का नाम एक प्रतिष्ठित धार्मिक संगठन से मिलता-जुलता ‘राधास्वामी संगठन’ रखा। इस नाम की आड़ में उसने कन्या दान योजना, वाहन योजना, आवास योजना और निवेश योजना जैसी फर्जी स्कीम चलाकर लोगों को भारी छूट और मुनाफे का लालच दिया। पटना के जक्कनपुर और हनुमान नगर में अपने मुख्य सेंटर खोलने के बाद उसने धीरे-धीरे जहानाबाद, अरवल, गया और नवादा में भी अपना जाल फैलाना शुरू कर दिया। संगठन की वेबसाइट के दावों के अनुसार, 11 राज्यों में इसके 50,000 से अधिक एजेंट काम कर रहे थे।
लग्जरी गाड़ियों का काफिला और जहानाबाद से लड़ा लोकसभा चुनाव

दीपक शर्मा की आलीशान जीवनशैली हमेशा उसके पैतृक गांव में चर्चा का विषय बनी रही। जब भी वह अपने गांव औहालचक आता था, तो वह स्कॉर्पियो, फॉर्च्यूनर और थार जैसी लग्जरी गाड़ियों के लंबे काफिले के साथ पहुंचता था। गांव में उसके घर के नाम पर सिर्फ एक पुराना पक्का कमरा है जो हमेशा बंद रहता है, लेकिन उसकी शाही जीवनशैली देखकर गांव वाले हमेशा अचंभित रहते थे। इसी काली कमाई और रुतबे के नशे में उसने वर्ष 2024 में जहानाबाद संसदीय क्षेत्र से राधास्वामी संगठन के नाम पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव भी लड़ा। हालांकि, इस चुनाव में जनता ने उसे नकार दिया और महज 8970 वोट पाकर उसकी जमानत भी जब्त हो गई। चुनाव में करारी हार के बावजूद उसने अपने गांव में 20 लाख रुपये नकद भुगतान कर एक बीघा कृषि भूमि खरीदी थी, जबकि अपने चुनावी हलफनामे में उसने अपनी चल संपत्ति 1.74 करोड़ रुपये घोषित की थी।
कानून का कसा शिकंजा: मास्टरमाइंड समेत कई लोगों पर एफआईआर दर्ज
इस बहुचर्चित धन परिचालन और धोखाधड़ी कांड के सामने आने के बाद पुलिस और जांच एजेंसियों ने इस सिंडिकेट पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सामने आई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में बीएनएस (BNS) की गंभीर धाराओं 318(2), 318(3), 318(4), 336(3), 338 और 316(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसके साथ ही धन परिचालन स्कीम (पाबंदी) अधिनियम की धारा 4, 5 और 6 भी लगाई गई है। इस बड़ी कार्रवाई में मुख्य सरगना दीपक शर्मा के साथ-साथ संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश कुमार सिन्हा, गिरिडीह जिला प्रभारी अनीशा सिन्हा, सुमित सिन्हा, अमित सिन्हा और जितेंद्र सिंह उर्फ सुबोध सिंह समेत कई अन्य लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। पुलिस अब फरार दीपक शर्मा की गिरफ्तारी और ठगी के इस पूरे काले साम्राज्य को ध्वस्त करने के लिए सघन तलाशी अभियान चला रही है।







