गया: मगध प्रक्षेत्र में पुलिस महकमे को भ्रष्टाचार और लापरवाही से मुक्त करने के लिए आईजी विकास वैभव अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) नीति के तहत लगातार भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। महज 24 घंटे के भीतर गया जिले में दो बड़ी कार्रवाइयां करते हुए आईजी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खाकी की आड़ में मनमानी, उगाही या ड्यूटी में कोताही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
रिश्वतखोरी पर सीधा प्रहार: खिजरसराय के सब-इंस्पेक्टर पर गिरी गाज
भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए 16 जुलाई को खिजरसराय थाने के तत्कालीन अनुसंधानकर्ता (SI) तेज नारायण चौबे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
यह कार्रवाई कांड संख्या 181/2026 से जुड़ी है, जिसमें एक ग्रामीण (सरैया बिगहा निवासी नागा यादव) का नाम केस से बाहर रखने के एवज में भय व दबाव बनाकर अवैध वसूली की मांग की जा रही थी। शिकायतकर्ता ने 21 मई 2026 को अपने दावों के समर्थन में ऑडियो रिकॉर्डिंग और पेन ड्राइव पुलिस को सौंपे थे। अंचल पुलिस निरीक्षक द्वारा की गई सूक्ष्म जांच में ऑडियो में SI चौबे की आवाज होने और अनुचित लाभ मांगने की प्रथम दृष्टया पुष्टि हुई। पुलिस संगठन की निष्पक्षता और जनविश्वास को गहरी चोट पहुंचाने वाले इस गंभीर कदाचार पर कड़ा एक्शन लेते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
लापरवाही और संदिग्ध कार्यशैली: मगध मेडिकल थानाध्यक्ष भी नपे
भ्रष्टाचार के साथ-साथ कार्य में लापरवाही पर भी आईजी का चाबुक चला है। 17 जुलाई को मगध मेडिकल थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष, पुलिस निरीक्षक कृष्णा कुमार को भी निलंबित कर दिया गया।
एक बेहद गंभीर आपराधिक मामले (कांड संख्या-224/2026) के अनुसंधान में उनकी घोर लापरवाही और स्वेच्छाचारिता सामने आई थी। पुलिस उपाधीक्षक (नगर-02) की विस्तृत जांच रिपोर्ट, स्टेशन डायरी और अन्य साक्ष्यों के परीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि थानाध्यक्ष ने अपने वैधानिक और प्रशासनिक दायित्वों का निष्पक्षता व सतर्कता से निर्वहन नहीं किया। इस कार्यशैली से गंभीर मामले की जांच की दिशा और गुणवत्ता प्रभावित होने की संभावना पैदा हो गई थी, जिसके चलते प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया।
महकमे को साफ संदेश: ‘जीरो टॉलरेंस’ से कोई समझौता नहीं
आईजी की इन ताबड़तोड़ कार्रवाइयों ने मगध रेंज के पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। आईजी विकास वैभव ने अपनी इस प्रशासनिक कार्रवाई से स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस विभाग में अनुशासनहीनता, पद का दुरुपयोग और निष्पक्ष अनुसंधान में बाधा डालने वाले किसी भी आचरण के प्रति शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति अपनाई गई है।
आम जनता का पुलिस पर विश्वास कायम रखने और कानून व्यवस्था के निष्पक्ष क्रियान्वयन के लिए भविष्य में भी भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारियों पर ऐसी ही कठोर कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।
(विशेष नोट: निलंबन अवधि के दौरान दोनों आरोपी अधिकारियों का मुख्यालय पुलिस केन्द्र, गया निर्धारित किया गया है और उन्हें केवल सामान्य जीवन-यापन भत्ता देय होगा।)






