गया। जिला मुख्यालय से महज आठ किलोमीटर की दूरी पर बसा बंधुआ महादलित टोला ‘शांति नगर’ अंधविश्वास के खूनी खेल का गवाह बना है। यहाँ महज ओझा-गुणी और डायन-भूत के शक में एक उग्र भीड़ ने 55 वर्षीय राजेंद्र मांझी (पिता- स्वर्गीय राजा मांझी) की पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या कर दी। यह हृदयविदारक घटना मृतक के परिजनों के सामने ही अंजाम दी गई। परिजन चीखते-चिल्लाते रहे, मिन्नतें करते रहे, लेकिन खून पर सवार उग्र भीड़ का दिल नहीं पसीजा। शांति नगर में लगभग 100 घर महादलित परिवार के हैं, लेकिन बुधवार की आधी रात को हुई इस बर्बरता को रोकने के लिए कोई आगे नहीं आया।

हत्या के बाद शव को रेलवे ट्रैक पर फेंका
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुफ़्सिल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस टोले में आरोपियों ने राजेंद्र मांझी की हत्या करने के बाद साक्ष्य छुपाने की कोशिश की। उन्होंने शव को पास ही स्थित गया-धनबाद रेलखंड पर बंधुआ स्टेशन से करीब एक किलोमीटर उत्तर रेल पटरी पर फेंक दिया। इस दौरान ट्रेन की चपेट में आने से शव क्षत-वििक्षत हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही मुफ़्सिल थाना के अपर थाना अध्यक्ष शशि भूषण प्रसाद, एसआई मोहम्मद इमरान खान और डीएसपी सुनील कुमार पांडेय भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने रेलवे ट्रैक से शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल अस्पताल भेज दिया है। पीड़ित परिवार की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों (सुरेंद्र मांझी और उसकी पत्नी कारी देवी) को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल गांव में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस गश्त तेज कर दी गई है।

मृतक के बेटे ने 13 लोगों को बनाया नामजद आरोपी
प्रभारी थाना अध्यक्ष शशि भूषण प्रसाद ने बताया कि इस विवाद की शुरुआत करीब 8-10 दिन पहले हुई थी, जब गांव के ही टुनटुन मांझी का 13 वर्षीय बेटा ताड़ के पेड़ से गिर गया था और उसकी मौत हो गई थी। इस हादसे को अंधविश्वास का रंग देते हुए गांव के ही एक गुट ने राजेंद्र मांझी पर ओझा-गुणी और तांत्रिक क्रिया करने का झूठा आरोप मढ़ दिया।
बुधवार की रात 15 से 20 की संख्या में लोग लाठी, डंडे और धारदार हथियारों से लैस होकर राजेंद्र के घर में घुस गए। घर के आंगन और दरवाजे पर खून के काफी धब्बे मिले हैं, जो यह बयां करते हैं कि राजेंद्र को तड़पा-तड़पा कर मारा गया। इस मामले में मृतक के बेटे अनुज कुमार के बयान पर कुल 13 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है।
तकनीक के दौर में अंधविश्वास का काला साया
आज का समाज जहां 21वीं सदी, सोशल मीडिया और सूचना तकनीक (IT) की ऊंचाइयों को छू रहा है, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि लोग आज भी इस कदर अंधविश्वास के अंधेरे में जी रहे हैं। किसी हादसे या बीमारी का वैज्ञानिक कारण समझने के बजाय सीधे किसी बेगुनाह को डायन या ओझा ठहराकर उसकी जान ले ली जाती है।
गौरतलब है कि गया जिले में यह कोई पहली घटना नहीं है। कुछ ही दिन पूर्व गया के फतेहपुर थाना क्षेत्र में भी दो महिलाओं की डायन और ओझा-गुणी के आरोप में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि हम तकनीकी रूप से जितने आधुनिक हो रहे हैं, क्या मानसिक रूप से उतने ही पीछे छूटते जा रहे हैं? फिलहाल पुलिस के डर से गांव के अन्य आरोपी पुरुष फरार हैं और पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।







