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औरंगाबाद: प्रशासनिक लापरवाही ने ली शिक्षक की जान, सोन नदी पुल के टूटे स्लैब ने बुझाया घर का चिराग

On: Sunday, April 19, 2026 12:01 PM

औरंगाबाद (मगध लाइव डेस्क): बिहार के औरंगाबाद जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने न केवल एक हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर दिया, बल्कि पुल निर्माण और रखरखाव से जुड़े महकमों की संवेदनहीनता को भी बेनकाब कर दिया है। एनएच-19 स्थित सोन पुल पर मरम्मत के नाम पर छोड़ी गई एक भारी चूक ने गया के एक सरकारी शिक्षक की जान ले ली।

जाम के बीच मौत का जाल

जानकारी के अनुसार, गया जिले के फतेहपुर प्रखंड अंतर्गत भारे गांव के निवासी और मध्य विद्यालय, भारे में कार्यरत शिक्षक शंभू प्रसाद (45) अपने मित्र विजेंद्र प्रसाद की बेटी के तिलक समारोह में शामिल होने रोहतास जा रहे थे। भीषण गर्मी और घंटों से लगे लंबे जाम के कारण जब बस सोन पुल पर रुकी, तो घुटन से बचने के लिए शंभू प्रसाद अन्य यात्रियों की तरह बस से नीचे उतरे।
उन्हें क्या पता था कि जिस पुल पर वो खड़े हैं, वहीं प्रशासन ने मौत का जाल बिछा रखा है। टहलने के दौरान पुल पर रखा एक असुरक्षित लोहे का स्लैब अचानक खिसक गया। संतुलन बिगड़ने के कारण शंभू प्रसाद सीधे सैकड़ों फीट नीचे सोन नदी में जा गिरे।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गईं सांसें

फोटो: सदर अस्पताल औरंगाबाद में इलाज के दौरान

स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों की मदद से उन्हें नदी से बाहर निकाला गया और लहूलुहान स्थिति में औरंगाबाद सदर अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, चोटें इतनी गंभीर थीं कि रास्ते में ही दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक के पिता ईश्वरी दयाल और पूरा परिवार इस खबर के बाद से स्तब्ध है।

सवालिया घेरे में प्रशासन: किसकी है जिम्मेदारी?

यह महज एक ‘हादसा’ नहीं, बल्कि प्रशासनिक और विभागीय लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण है। NH-19 जैसे व्यस्ततम मार्ग के पुल पर लोहे के स्लैब को असुरक्षित तरीके से छोड़ देना सीधे तौर पर राहगीरों की जान से खिलवाड़ है।

पहला सवाल: क्या पुल के स्लैब की मरम्मत के दौरान वहां सुरक्षा घेरा (Barricading) या चेतावनी बोर्ड लगाया गया था?

दूसरा सवाल: निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों ने यह सुनिश्चित क्यों नहीं किया कि स्लैब स्थिर है?
एक जिम्मेदार शिक्षक, जो समाज का भविष्य गढ़ रहे थे, आज तंत्र की इसी नाकामी की भेंट चढ़ गए।

गमगीन माहौल में हुआ पोस्टमार्टम

देर रात औरंगाबाद सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिया गया। मृतक के दोस्त विजेंद्र प्रसाद ने रुंधे गले से बताया, “शंभू बेहद मिलनसार और जिम्मेदार व्यक्ति थे। वो हमारी खुशियों में शामिल होने आ रहे थे, लेकिन रास्ते की अव्यवस्था ने उनसे उनकी जिंदगी ही छीन ली।”

मगध लाइव की अपील: इस दुखद घटना ने एक बार फिर बिहार में पुलों की सुरक्षा और मेंटेनेंस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या संबंधित विभाग इस मौत की जिम्मेदारी लेगा या हर बार की तरह फाइलें दबा दी जाएंगी?

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