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कौन जीतेगा 50 लाख का ईनाम? आज शाम 7:30 बजे साधना टीवी पर होने जा रहा है भारत का सबसे बड़ा आध्यात्मिक शास्त्रार्थ

On: Friday, October 2, 2026 10:45 PM

क्या हम सदियों से अपने ही पवित्र ग्रंथों को गलत समझते आ रहे हैं? क्या हमारे धर्मगुरुओं ने हमें सनातन का वास्तविक ज्ञान दिया है? इन सभी सुलगते सवालों का जवाब आज शाम पूरे देश के सामने आने वाला है।

भारत के आध्यात्मिक इतिहास में आज एक ऐसा महा-शास्त्रार्थ (डिबेट) शुरू होने जा रहा है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिक गई हैं। सतलोक आश्रम धनाना के संचालक संत रामपाल जी महाराज ने देश और दुनिया के सभी धर्मगुरुओं को एक खुली चुनौती दे डाली है। उनकी घोषणा स्पष्ट है कि जो भी धर्मगुरु उनके आध्यात्मिक ज्ञान को शास्त्रों के प्रमाणों के आधार पर गलत साबित कर देगा, उसे 50 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।

आज शाम से बजेगा शास्त्रार्थ का शंखनाद

  • यह विशेष और ऐतिहासिक आध्यात्मिक चर्चा आज यानी शनिवार 3 अक्टूबर और कल रविवार 4 अक्टूबर 2026 को साधना टीवी चैनल पर लाइव प्रसारित की जाएगी।
  • दर्शक इस महा-बहस को आज शाम 7:30 बजे से रात 9:30 बजे तक लाइव देख सकेंगे।
  • संत रामपाल जी महाराज ने बताया है कि इस डिबेट का सबसे पहला विषय ‘सृष्टि रचना’ होगा, जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि सृष्टि की उत्पत्ति वास्तव में कैसे हुई।
  • उन्होंने यह भी छूट दी है कि यदि कोई धर्मगुरु अपना टीवी चैनल बुक नहीं कर सकता है, तो वह यूट्यूब (YouTube) या इंस्टाग्राम (Instagram) के माध्यम से भी अपना तर्क और पक्ष रख सकता है।

सनातन धर्म के संविधान पर आधारित होगी बहस

संत रामपाल जी का स्पष्ट कहना है कि उनकी वकालत और उनका पक्ष पूरी तरह से हमारे पवित्र ग्रंथों पर आधारित होगा। इस शास्त्रार्थ का मुख्य आधार चारों वेद (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद), श्रीमद्भगवद्गीता, 18 पुराण, महाभारत, रामचरितमानस, वाल्मीकि रामायण और श्रीमद्भागवत (सुधा सागर) जैसे प्रामाणिक ग्रंथ होंगे। उनका कहना है कि यदि उनके ज्ञान में इन शास्त्रों से बाहर की कोई बात या त्रुटि निकलती है, तो वे सौ बार माफी मांगेंगे और 50 लाख रुपये का ईनाम भी देंगे। इस चुनौती को स्वीकार करने वाले धर्मगुरुओं पर कोई शर्त नहीं थोपी गई है।

हार-जीत नहीं, जनता रूपी जज करेगी फैसला

इस डिबेट का मुख्य उद्देश्य किसी को छोटा या बड़ा साबित करना या हार-जीत का फैसला करना नहीं है। इसका एकमात्र लक्ष्य भ्रमित भक्त समाज को शास्त्रों के अनुकूल एक सही और सत्य दिशा प्रदान करना है। संत रामपाल जी ने कहा है कि इस बहस का फैसला कोई एक व्यक्ति या बंद कमरा नहीं, बल्कि भारत की शिक्षित और जागरूक जनता रूपी जज के द्वारा किया जाएगा।

विवाद और शास्त्रार्थ का पुराना रहा है इतिहास

यह कोई पहला मौका नहीं है जब संत रामपाल जी महाराज ने धर्मगुरुओं को चुनौती दी हो। उनका विभिन्न पंथों और धर्मों के गुरुओं के साथ चर्चा का एक लंबा इतिहास रहा है।

  • साल 2013 में उन्होंने इस्लाम के प्रसिद्ध वक्ता डॉ. जाकिर नाइक की चुनौती को स्वीकार करते हुए राष्ट्रीय टेलीविजन पर बहस की थी।
  • इस बहस में जाकिर नाइक का मानना था कि अल्लाह निराकार है, लेकिन संत रामपाल जी ने कुरान शरीफ के हवाले से यह साबित किया था कि परमात्मा साकार है।
  • इसके अलावा उन्होंने डॉ. नाइक के सामने यह भी सिद्ध किया था कि इस्लामी ग्रंथों (जैसे कुरान और बाइबिल) में भी जन्म-मृत्यु का चक्र और शाकाहारी भोजन (पेड़-पौधे खाने) का आदेश है, जो कि नाइक की मान्यताओं के उलट था।
  • 11 अक्टूबर 2009 को भी उन्होंने चारों पीठों के शंकराचार्यों को ज्ञान चर्चा के लिए आमंत्रित किया था।
  • हाल ही में अगस्त 2026 में कैथल में वेद प्रचार मंडल और आर्य समाज के पदाधिकारियों ने उनके विचारों के विरोध में महासम्मेलन करने की भी घोषणा की थी।

मगध लाइव न्यूज की विशेष अपील: आज शाम 7:30 बजे जो होने वाला है, वह कोई आम टीवी कार्यक्रम नहीं है। यह सत्य और भ्रांति के बीच का वह महासंग्राम है जो हमारी पीढ़ियों की सोच बदल सकता है। क्या आज कोई भी धर्मगुरु संत रामपाल जी के ज्ञान को गलत साबित कर 50 लाख का ईनाम जीत पाएगा? या फिर सदियों से चली आ रही मान्यताओं में आज कोई बड़ा बदलाव आएगा? आप भी आज शाम साधना टीवी पर इस ऐतिहासिक शास्त्रार्थ के गवाह बनें और स्वयं शास्त्रों के आधार पर सत्य की परख करें। सच्चाई क्या है, यह आज भारत की जनता खुद तय करेगी!

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