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गया नगर निगम के उपमहापौर चिंता देवी की चिंता स्वाभाविक रूप से बढ़ गई होगी!

देवब्रत मंडल

बिहार में पिछले वर्ष हुए नगर निकायों के चुनाव के बाद उपमुख्य पार्षदों ने बिहार सरकार से मुख्य पार्षदों के समतुल्य अधिकार, अन्य शक्तियां तथा सुविधाओं की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार की ओर से उनकी मांग पर विचारोपरांत ऐसा कुछ नहीं देने जा रही है। सरकार नगरपालिका अधिनियम 2007 का हवाला देते हुए इनके अधिकार, कर्तव्य एवं दायित्वों के निर्वहन करने की बात कह रही है। बताना लाजिमी है कि इस बार उपमुख्य पार्षदों को जनता ने सीधा चुना है, जिस प्रकार मुख्य पार्षद चुने गए हैं। विश्वसनीय स्रोत के हवाले से बताया जा रहा है कि गया नगर निगम के उपमहापौर/उपमुख्य पार्षद सहित बिहार के तमाम उपमुख्य पार्षद लगातार सरकार को पत्र भेजकर उनसे कभी वाहन की सुविधा तो कभी वित्तीय शक्तियां सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने को कह रहे हैं लेकिन सरकार ने हाल ही में इस आलोक में दो पत्र जारी किए हैं। देखा जाए तो इन दोनों पत्र के मुताबिक सरकार की तरफ से इन उपमुख्य पार्षदों को निराशाजनक उत्तर ही अबतक मिलता रहा है।
हाल ही में उपमुख्य पार्षदों ने सरकार से वित्तीय शक्ति, संचिकाओं के अपने पास उपस्थापित करने आदि सहित अन्य शक्तियां और सुविधाएं देने की मांग की थी। जिसके बाद नगर विकास एवं आवास विभाग के अपर सचिव धर्मेंद्र कुमार ने 20 अक्टूबर 2023 को एक पत्र निर्गत करते हुए स्पष्ट रूप से कह दिया कि उपमुख्य पार्षद बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 में निहित प्राविधान/प्रावधानों के अनुरूप ही अपने अपने अधिकार और कर्तव्यों को संपादित करेंगे। हालांकि नगरपालिका अधिनियम में यह प्रावधान है कि मुख्य पार्षदों के पद यदि किसी कारणवश लंबी अवधि तक रिक्त रहता है तो उपमुख्य पार्षद को स्वतः ही वे सारे अधिकार प्राप्त होंगे जो मुख्य पार्षद को दिए गए हैं।
बताते चलें कि इसके पहले उपमुख्य पार्षदों ने सरकार से अपने निर्वाचन क्षेत्र में भ्रमण के लिए वाहन उपलब्ध कराने की मांग की थी लेकिन उस वक़्त भी नगर विकास एवं आवास विभाग के तत्कालीन अपर सचिव ने 26 सिंतबर 2023 को एक पत्र जारी कर एक प्रकार से वाहन की सुविधा देने से मना कर दिया था। सरकार ने यह सुविधा केवल मुख्य पार्षदों को देने की बात कही थी। इस पर होने वाले खर्च संबंधित नगर निगम/नगर परिषद अपने आय के आंतरिक स्रोत से वहन करेगा लेकिन इस शर्त के साथ कि निकायों से संबंधित जिलों के जिलाधिकारी द्वारा निर्धारित दर(रेट) पर ही वाहन की सुविधा महापौर को दिया जाना है।
सरकार के इन दोनों पत्र के गया नगर निगम में पहुंचने के बाद बिहार के अन्य निकायों के उपमहापौर/उपमुख्य पार्षदों के साथ साथ गया नगर निगम के उपमहापौर चिंता देवी की चिंता स्वाभाविक रूप से बढ़ गई होगी।