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गया-किउल रेलखंड दोहरीकरण परियोजना पूरी: संरक्षा आयुक्त ने किया निरीक्षण, जल्द शुरू होगा ट्रेनों का परिचालन

On: Wednesday, February 5, 2025 3:28 PM

देवब्रत मंडल

गया। बिहार के रेलवे नेटवर्क को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। दानापुर मंडल के अंतर्गत 124 किलोमीटर लंबे गया-किउल रेलखंड के दोहरीकरण कार्य को पूरा कर लिया गया है। मंगलवार को मुख्य संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ने नवादा-तिलैया खंड के नव-दोहरीकृत 17 किलोमीटर हिस्से का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नई बिछाई गई दोहरी लाइन, पुल-पुलिया, स्टेशन भवन, पैनल रूम, रिले रूम और आईपीएस रूम का गहन निरीक्षण किया।

निरीक्षण के तहत संरक्षा आयुक्त ने विशेष ट्रेन से 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से स्पीड ट्रायल किया, जो पूरी तरह सफल रहा। अब अंतिम स्वीकृति मिलते ही इस नए दोहरीकृत रेलखंड पर ट्रेनों का नियमित परिचालन शुरू कर दिया जाएगा। इस महत्वपूर्ण मौके पर दानापुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक जयंत कुमार चौधरी सहित रेलवे के निर्माण विभाग और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

रेलवे नेटवर्क को मिलेगी मजबूती

गया-किउल रेलखंड पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर और पं. दीनदयाल उपाध्याय मंडल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो ग्रैंड कॉर्ड और मुख्य लाइन पर यातायात के दबाव को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा। इस परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र में रेलवे यातायात और तेज, सुगम और सुरक्षित होगा।

इस दोहरीकरण परियोजना पर करीब 1200 करोड़ रुपये की लागत आई है, जिसे वित्तीय वर्ष 2015-16 में मंजूरी दी गई थी। इसके पूरा होने से गया-किउल रेलखंड पर ट्रेनों की गति बढ़ेगी, जिससे औद्योगिक और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

बिहार के कई जिलों को मिलेगा फायदा

गया-किउल दोहरीकरण परियोजना लखीसराय, शेखपुरा, नवादा और आसपास के जिलों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी। साथ ही, दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर यात्रा करने वाले यात्रियों को भी इससे लाभ मिलेगा।

चरणबद्ध तरीके से पूरा हुआ दोहरीकरण कार्य

गया-किउल दोहरीकरण परियोजना को कई चरणों में पूरा किया गया:

  • दिसंबर 2019मानपुर-वजीरगंज खंड परिचालन के लिए खोला गया।
  • सितंबर 2022वजीरगंज-तिलैया खंड का कार्य पूरा हुआ।
  • फरवरी 2023किउल-शेखपुरा खंड चालू हुआ।
  • सितंबर 2023शेखपुरा-काशीचक खंड दोहरीकरण पूरा हुआ।
  • जनवरी 2024काशीचक-वारिसलीगंज खंड तैयार हुआ।
  • जुलाई 2024वारिसलीगंज-नवादा खंड चालू हुआ।

परियोजना के तहत पैमार, नवादा, सिरारी, वजीरगंज, करजारा, करौटा पटनेर, काशीचक, शेखपुरा, वारिसलीगंज और मानपुर सहित कई नए रेलवे यार्डों का निर्माण किया गया है।

मजबूत संरचना और सुरक्षा उपाय

124 किलोमीटर लंबे इस रेलखंड में 32 बड़े पुल और 304 छोटे पुलों का निर्माण किया गया है। इससे न केवल ट्रेनों की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित होगी, बल्कि रेलवे परिचालन की क्षमता भी बढ़ेगी।

यात्रियों और व्यापारिक गतिविधियों को मिलेगा लाभ

इस परियोजना के पूरा होने से न केवल ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि बिहार और आसपास के राज्यों में व्यापारिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी। अब यात्रियों को अधिक सुगम, सुरक्षित और तेज़ यात्रा का अनुभव मिलेगा, जिससे बिहार का रेल नेटवर्क और सशक्त बनेगा।

क्या होगा फायदा?

तेज और सुचारू रेल परिचालन
औद्योगिक और आर्थिक विकास को गति
यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा
दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर यात्री भार कम होगा

अब इस परियोजना के पूरा होने से बिहार के रेलवे यातायात में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इससे राज्य की कनेक्टिविटी को नया आयाम मिलेगा और यात्रियों को बेहतरीन रेल सेवा का अनुभव होगा।

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