मगध लाइव न्यूज़ डेस्क | गया
ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बच्चों के भविष्य को नई दिशा देने के उद्देश्य से भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) बोधगया ने अपनी प्रमुख शैक्षिक पहल ‘स्पर्श 2.0’ का विस्तार किया है। वर्ष 2024 में महुदार गांव के एक स्कूल से शुरू हुई यह पहल अब गया जिले के 10 ग्रामीण विद्यालयों तक पहुंच चुकी है। इसके माध्यम से कुल 568 विद्यार्थियों को पढ़ाई, बुनियादी कौशल और व्यक्तित्व विकास के क्षेत्र में सहायता मिलेगी। आईआईएम बोधगया की सीएसआर एवं सोशल इनोवेशन कमेटी ‘प्रगति’ की यह पहल ग्रामीण शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।
एक स्कूल से 10 गांवों तक पहुंचा शिक्षा का अभियान
आईआईएम बोधगया ने वर्ष 2024 में महुदार गांव से ‘स्पर्श’ कार्यक्रम की शुरुआत की थी। शुरुआती अनुभवों में विद्यार्थियों की स्कूल में उपस्थिति, कक्षा में सक्रियता और पढ़ाई के प्रति भागीदारी में उत्साहजनक सुधार देखने को मिला। इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2026 में इस कार्यक्रम का विस्तार नौ अन्य गांवों तक किया गया है।
अब जिंदापुर, तुरी कला, तुरी बुजुर्ग, रामपुर, टिकाबिघा, मोचारिम, सिलोंजा, बसाढ़ी और श्रीनगर बैजूबिघा के ग्रामीण विद्यालय भी इस पहल से जुड़ चुके हैं। ग्लैड भारत फाउंडेशन के सहयोग और वेरिज़ोन इंडिया के सीएसआर के तहत प्राप्त वित्तीय सहायता से संचालित ‘स्पर्श 2.0’ का उद्देश्य ग्रामीण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।
बुनियादी शिक्षा से लेकर व्यक्तित्व विकास तक होगा फोकस

‘स्पर्श 2.0’ के तहत स्पर्श फेलोज नियमित और व्यवस्थित कक्षाओं के माध्यम से बच्चों की बुनियादी पढ़ने, लिखने और गणितीय क्षमताओं को मजबूत करेंगे। इसके अतिरिक्त आईआईएम बोधगया के विद्यार्थी स्वयंसेवक प्रत्येक शनिवार को विशेष शिक्षण सत्र आयोजित करेंगे। इन सत्रों के माध्यम से बच्चों को नियमित कक्षाओं में सीखी गई चीजों को दोहराने और अपनी समझ बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा।
संस्थान की निदेशक डॉ. विनिता एस. सहाय के मार्गदर्शन में संचालित इस कार्यक्रम में शिक्षकों, विद्यार्थी स्वयंसेवकों और सहयोगी संस्थाओं को एक साझा मंच पर लाया गया है। इससे जहां ग्रामीण बच्चों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता मिलेगी, वहीं आईआईएम के विद्यार्थियों को भी समुदाय के बीच काम करने और अपनी प्रबंधन संबंधी सीख को व्यवहार में उतारने का अवसर मिलेगा। इस अनुभव से उनमें नेतृत्व क्षमता, सामाजिक संवेदनशीलता और ग्रामीण चुनौतियों को समझने की भावना विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा की भी मिलेगी तैयारी
इस पहल की खास बात यह है कि इसमें केवल पारंपरिक पढ़ाई तक सीमित रहने के बजाय बच्चों के संपूर्ण विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत ध्यान, रचनात्मक गतिविधियों और वित्तीय साक्षरता जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है, ताकि बच्चों में आत्मविश्वास बढ़े और वे अपनी क्षमताओं को बेहतर तरीके से पहचान सकें।
वहीं, प्राथमिक विद्यालय श्रीनगर बैजूबिघा में जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी) की प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसमें अब तक 17 विद्यार्थियों ने नामांकन कराया है। इस पहल से ग्रामीण प्रतिभाओं को बेहतर शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है।
बिहार में बुनियादी शिक्षा की चुनौती, ASER रिपोर्ट के आंकड़े चिंताजनक
ग्रामीण शिक्षा की स्थिति को लेकर वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (ASER) 2024 के आंकड़े भी इस तरह की पहलों की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में कक्षा तीन के केवल 26.1 प्रतिशत बच्चे ही कक्षा दो के स्तर का पाठ पढ़ पाने में सक्षम थे। वहीं, लगभग 37.4 प्रतिशत बच्चे कम से कम घटाव के सवाल हल कर सकते थे।
ऐसे में आईआईएम बोधगया की ‘स्पर्श 2.0’ जैसी पहल का महत्व और बढ़ जाता है। इसका उद्देश्य बच्चों की बुनियादी शैक्षणिक कमजोरियों को दूर करने के साथ-साथ उनमें सीखने की रुचि, आत्मविश्वास और भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना है।
इस पूरी पहल का नेतृत्व ‘प्रगति’ के अध्यक्ष प्रो. सुरेश के. जी. और सह-अध्यक्ष प्रो. अजित टॉम जेम्स कर रहे हैं। सीएसआर समिति की सदस्य प्रो. रजनी सुरेश और प्रो. अमृत पांडा भी कार्यक्रम में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। आईआईएम बोधगया की यह पहल शिक्षा के माध्यम से ग्रामीण समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और बच्चों के लिए बेहतर भविष्य की संभावनाएं तैयार करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।







