मगध लाइव न्यूज़ डेस्क
अगर आप लंबी दूरी की ट्रेन से सफर करते हैं और कई घंटे तक उसी कोच में यात्रा करनी पड़ती है, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। पूर्व मध्य रेल ने 40 घंटे से अधिक की यात्रा अवधि वाली चिन्हित लंबी दूरी की ट्रेनों में स्वच्छता और यात्री सुविधाओं की निगरानी को और मजबूत करने का फैसला किया है। रेलवे का फोकस सिर्फ ट्रेन की शुरुआती सफाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे सफर के दौरान कोच, शौचालय, कचरा प्रबंधन और बायो-टॉयलेट की स्थिति पर नजर रखने की व्यवस्था की गई है।
लंबे सफर में बार-बार होगी सफाई, शिकायतों पर भी नजर
पूर्व मध्य रेल के अनुसार, चिन्हित ट्रेनों में ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग सर्विस (OBHS) को प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा। इसके तहत यात्रा के दौरान कोच और शौचालयों की नियमित सफाई, कचरा संग्रहण तथा छोटे-मोटे अनुरक्षण कार्य किए जाएंगे। यात्रियों से मिलने वाली स्वच्छता संबंधी शिकायतों की भी नियमित समीक्षा और उनके त्वरित निवारण पर जोर दिया गया है।
इसका सीधा मतलब यह है कि लंबी दूरी की यात्रा में सफाई व्यवस्था को केवल ट्रेन खुलने से पहले की जिम्मेदारी नहीं माना जाएगा। संबंधित डिपो, अधिकारी और पर्यवेक्षक यात्रा के दौरान भी व्यवस्था की निगरानी करेंगे और साप्ताहिक स्तर पर इसकी समीक्षा की जाएगी।
इन प्रमुख ट्रेनों पर विशेष निगरानी
पूर्व मध्य रेल से खुलने या गुजरने वाली 40 घंटे से अधिक की यात्रा अवधि वाली प्रमुख ट्रेनों में डिब्रूगढ़-लालगढ़ अवध आसाम एक्सप्रेस, अहमदाबाद-सहरसा-अहमदाबाद एक्सप्रेस, दानापुर-एसएमवीबी बेंगलुरु-दानापुर एक्सप्रेस, पुणे-सुपौल-पुणे एक्सप्रेस, कटिहार-अमृतसर-कटिहार आम्रपाली एक्सप्रेस, राजगीर-लोकमान्य तिलक टर्मिनल-राजगीर एक्सप्रेस और सहरसा-अमृतसर-सहरसा गरीब रथ एक्सप्रेस शामिल हैं।
इनमें राजगीर-लोकमान्य तिलक टर्मिनल-राजगीर एक्सप्रेस और दानापुर-एसएमवीबी बेंगलुरु-दानापुर एक्सप्रेस का प्राइमरी मेंटेनेंस पूर्व मध्य रेल द्वारा किया जाता है। बाकी चिन्हित ट्रेनों का प्राइमरी मेंटेनेंस दूसरे रेल जोन में होता है। हालांकि, इन ट्रेनों की सफाई व्यवस्था की निगरानी और बरौनी तथा डीडीयू के क्लीन ट्रेन स्टेशन के तहत विशेष सफाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
हर दो घंटे में कचरा संग्रहण, बायो-टॉयलेट की भी जांच
रेलवे ने ट्रेनों में हर दो घंटे पर कचरा संग्रहण की व्यवस्था पर विशेष जोर दिया है। यात्रियों द्वारा कोच में छोड़े गए कचरे को निर्धारित कचरा निस्तारण या क्लीन ट्रेन स्टेशन प्वाइंट पर उतारकर नियमानुसार निस्तारित किया जाएगा।
बायो-टॉयलेट की कार्यशीलता पर भी विशेष निगरानी होगी। बेस डिपो और चिन्हित मार्गवर्ती स्थानों पर बायो-टॉयलेट की जांच तथा जरूरत के अनुसार अनुरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा ट्रेन के कोच और शौचालयों की वास्तविक स्वच्छता स्थिति की निगरानी के लिए निर्धारित स्थानों पर समय-मुद्रित तस्वीरें लेने की व्यवस्था भी की जा रही है।
159 ट्रेनों का प्राइमरी मेंटेनेंस, 81 में OBHS सुविधा
पूर्व मध्य रेल के मुताबिक वर्तमान में उसके द्वारा 159 ट्रेनों का प्राइमरी मेंटेनेंस किया जाता है, जबकि 81 ट्रेनों में ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग सर्विस यानी OBHS की सुविधा उपलब्ध है। रेलवे ने सफाई व्यवस्था के साथ-साथ यात्रियों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और OBHS कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया है।
रेलवे की यह व्यवस्था खास तौर पर उन यात्रियों के लिए अहम है जो एक ही ट्रेन में लंबे समय तक सफर करते हैं। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि यात्रा के दौरान तय की गई सफाई व्यवस्था और निगरानी को जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।








