मगध लाइव न्यूज़ डेस्क | गोमो/फतेहपुर
झारखंड के गोमो जंक्शन से सोमवार की सुबह रेलवे प्रशासन और सुरक्षा बलों की एक बड़ी लापरवाही और संवेदनहीनता उजागर हुई है। रेलवे स्टेशन पर हाई-वोल्टेज करंट की चपेट में आकर एक व्यक्ति मालगाड़ी के ऊपर से गिरकर गंभीर रूप से झुलस गया। हैरानी की बात यह रही कि मौके पर मौजूद प्रशासनिक कर्मी और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) उसे मृत मानकर मूकदर्शक बने रहे। लेकिन, इसी दौरान इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए गया जिले के फतेहपुर से वहां पहुंचे पत्रकार कंचन कुमार यादव और उनके शिक्षक साथियों ने अपनी जान की बाजी लगाकर उस व्यक्ति को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया।
इंटरसिटी ट्रेन पकड़ने पहुंचे थे फतेहपुर के युवा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, फतेहपुर निवासी पत्रकार कंचन कुमार यादव अपने अन्य साथियों के साथ एक कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद सोमवार अहले सुबह करीब 5:30 बजे इंटरसिटी ट्रेन पकड़ने के लिए गोमो जंक्शन पहुंचे थे। इसी बीच प्लेटफॉर्म नंबर तीन के समीप खड़ी एक मालगाड़ी के पास उन्हें एक व्यक्ति करंट लगने के बाद गिरा हुआ दिखाई दिया। जहां रेलवे पुलिस और अन्य लोग उसे मरा हुआ समझकर दूर खड़े थे, वहीं कंचन यादव और शिक्षक आडवाणी सर की पैनी नजर ने भांप लिया कि पीड़ित की सांसें अभी चल रही हैं और उसमें जान बाकी है।
जान की परवाह किए बिना ट्रैक पर उतरे जांबाज

पीड़ित को जिंदा देखते ही कंचन यादव ने बिना एक पल का समय गंवाए रेलवे ट्रैक पर छलांग लगा दी और उसे बचाने का प्रयास शुरू कर दिया। उनके इस साहसिक कदम को देखते हुए उनके अन्य साथी आडवाणी सर, जितेंद्र सर, नवीन सर, उमेश सर और गुड्डू चौधरी ने भी अदम्य साहस का परिचय दिया और बचाव कार्य में जुट गए। इन सभी युवाओं ने मिलकर काफी मशक्कत के बाद गंभीर रूप से झुलसे उस व्यक्ति को सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर लाया।
आरपीएफ का बेतुका फरमान- ‘पहले रिपोर्ट भेजेंगे, फिर इलाज’
जान जोखिम में डालकर पीड़ित को बचाने के बाद जब इन युवाओं का सामना रेलवे पुलिस से हुआ, तो प्रशासन का रवैया बेहद शर्मनाक था। पत्रकार कंचन यादव ने बताया कि जब घायल को कड़ी मशक्कत के बाद प्लेटफॉर्म पर लाया गया, तो वहां तमाशबीन बनी आरपीएफ ने मदद करने के बजाय बेतुका फरमान सुनाते हुए कहा कि वे पहले अपनी विभागीय रिपोर्ट बनाकर भेजेंगे, उसके बाद ही घायल को अस्पताल भेजा जा सकता है। आरपीएफ के इस संवेदनहीन रवैये पर कंचन यादव और वहां मौजूद अन्य लोगों ने कड़ी आपत्ति जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। लोगों के भारी विरोध और एतराज के बाद आरपीएफ बैकफुट पर आई और आनन-फानन में एंबुलेंस बुलाकर घायल को नजदीकी अस्पताल भेजा गया।
फतेहपुर के युवाओं की हो रही चहुंओर प्रशंसा
गंभीर रूप से झुलसे व्यक्ति का अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस घटना के बाद गोमो जंक्शन पर मौजूद हर कोई फतेहपुर के इन युवाओं की भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों का स्पष्ट कहना था कि यदि पत्रकार कंचन कुमार यादव और उनके साथियों ने समय रहते अपनी जान जोखिम में डालकर यह मानवीय पहल नहीं की होती, और आरपीएफ के भरोसे बैठे रहते, तो उस व्यक्ति का बचना नामुमकिन था। फतेहपुर के इन जांबाजों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि इंसानियत आज भी जिंदा है।







