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शेरघाटी: अधिवक्ता को हथकड़ी लगाने पर भड़का आक्रोश, बार एसोसिएशन ने न्यायिक कार्य का किया बहिष्कार

On: Wednesday, May 20, 2026 6:03 PM

शेरघाटी। बिहार के गया जिले के गुरुआ थाना में एक स्थानीय अधिवक्ता के साथ कथित अभद्र व्यवहार और उन्हें हथकड़ी लगाकर कोर्ट भेजने का मामला अब पूरी तरह तूल पकड़ चुका है। इस घटना के विरोध में शेरघाटी बार एसोसिएशन पूरी तरह से पीड़ित अधिवक्ता के समर्थन में उतर आया है। एसोसिएशन ने पुलिसिया कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए खुद को न्यायिक कार्यों से अलग रखने (कार्य बहिष्कार) का बड़ा निर्णय लिया है।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुआ थाना क्षेत्र के तेलियाचक निवासी अधिवक्ता मुसाफिर रविदास गांव में बच्चों के बीच हुए एक विवाद के सिलसिले में अपना पक्ष रखने के लिए गुरुआ थाना गए थे। पीड़ित अधिवक्ता का आरोप है कि जैसे ही वे थाने पहुंचे, थानाध्यक्ष मनीष कुमार ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें सीधे हाजत (लॉकअप) में बंद कर दिया।

‘रातभर भूखा रखा, फिर खुले टेंपो में हथकड़ी लगाकर भेजा कोर्ट’

अधिवक्ता मुसाफिर रविदास ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा “मुझे पूरी रात थाने में अवैध रूप से बंद रखा गया। इस दौरान मुझे खाने-पीने तक की कोई सुविधा नहीं दी गई। हद तो तब हो गई जब अगले दिन पुलिस ने मानवाधिकारों और अदालती गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाते हुए, मुझे एक खुले टेंपो में हथकड़ी लगाकर कोर्ट भेज दिया।”

कोर्ट परिसर में भारी हंगामा, अधिवक्ताओं ने खुलवाई हथकड़ी

जैसे ही पुलिस टीम पीड़ित अधिवक्ता को हथकड़ी पहनाकर शेरघाटी कोर्ट परिसर लेकर पहुंची, वहां मौजूद अन्य वकीलों का गुस्सा फूट पड़ा। बार एसोसिएशन के सदस्यों ने पुलिस की इस बर्बर और अपमानजनक कार्रवाई पर तीखी आपत्ति दर्ज कराई और तुरंत अधिवक्ता की हथकड़ी खुलवाई। इस घटना को लेकर कोर्ट परिसर में काफी देर तक गहमा-गहमी और हंगामे की स्थिति बनी रही।

कोर्ट से मिली जमानत

इसके बाद पुलिस ने अधिवक्ता मुसाफिर रविदास को न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (Judicial Magistrate First Class) एहसान रशीद की अदालत में पेश किया। मामले की गंभीरता और दलीलों को सुनने के बाद माननीय अदालत ने अधिवक्ता को जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया।

बार एसोसिएशन की चेतावनी

इस घटना के बाद वकीलों में पुलिस प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष है। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि एक कानून के रक्षक (अधिवक्ता) के साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिवक्ताओं ने दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है और साफ किया है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

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