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सिन्धुगढ़ थाना प्रभारी पर पूर्व पंचायत समिति सदस्य ने लगाया मारपीट का आरोप, SSP से शिकायत

On: Saturday, February 7, 2026 3:07 AM

गयाजी। बिहार के गया जिले से पुलिसिया कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सिन्धुगढ़ थाना प्रभारी निलेश कुमार पर नौडीहा झुरांग पंचायत के पूर्व पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि आशीष कुमार ने सादे लिबास में रोककर मारपीट करने और झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित ने वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) को आवेदन देकर न्याय और दोषी अधिकारी की बर्खास्तगी की गुहार लगाई है।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित आशीष कुमार के अनुसार, घटना 4 फरवरी 2026 की शाम करीब 7:00 बजे की है। जब वे अपने चचेरे भाई से मिलने हेमडीह गाँव जा रहे थे, तभी साँवरचक मोड़ के पास बाइक सवार दो अज्ञात व्यक्तियों ने उन्हें रोका। आशीष का आरोप है कि सादे कपड़े में मौजूद इन लोगों ने पहले उनकी जाति पूछी और फिर बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी, जिससे उनकी बाईं आँख और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं।
पीड़ित का दावा है कि बाद में पुलिस वाहन आने पर उन्हें सिन्धुगढ़ थाना ले जाया गया, जहाँ उन्हें पता चला कि मारपीट करने वाले व्यक्ति स्वयं थाना प्रभारी निलेश कुमार थे।

साजिश और प्रताड़ना का आरोप

आशीष कुमार ने आरोप लगाया कि थाने में उन्होंने थाना प्रभारी को किसी से फोन पर यह कहते सुना कि “आपके कहने पर आशीष को उठा लिया है ताकि वह आपके खिलाफ न जा सके।” पीड़ित, जो कि खुद एक जन-प्रतिनिधि हैं और ठेकेदारी व पीडीएस संचालन से जुड़े हैं, का कहना है कि उन्हें जानबूझकर ‘शराब और बालू माफिया’ का लाइनर बताकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जबकि उनके खिलाफ किसी भी थाने में कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।

थानाध्यक्ष की सफाई: “आरोप बेबुनियाद, आंखों में हो सकता है इन्फेक्शन”

दूसरी ओर, सिन्धुगढ़ थाना प्रभारी निलेश कुमार ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा:

  • पुलिस दल गश्ती पर था और रात करीब 10:30 बजे आशीष कुमार को संदिग्ध अवस्था में बार-बार आवाजाही करते देखा गया।
  • बालू और शराब तस्करी के ‘लाइनर’ होने के संदेह में उन्हें पूछताछ के लिए थाने लाया गया था।
  • हेल्मेट न होने के कारण उन पर जुर्माना लगाया गया और रात 11:25 बजे छोड़ दिया गया।
  • मारपीट के सवाल पर उन्होंने कहा कि थाने में लगे CCTV इसके गवाह हैं कि कोई हिंसा नहीं हुई। आँखों की चोट पर उन्होंने तर्क दिया कि यह पहले से कोई ‘आई इन्फेक्शन’ हो सकता है।

एक तरफ पीड़ित की सूजी हुई आँख और शरीर के जख्म पुलिस की बर्बरता की ओर इशारा कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस इसे केवल एक सामान्य पूछताछ और ट्रैफिक नियम उल्लंघन का मामला बता रही है। अब देखना होगा कि गेंद वरीय पुलिस अधीक्षक इस मामले में क्या जांच और कार्रवाई करती है।

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