मगध लाइव न्यूज़ डेस्क | गया
बिहार के मोक्षधाम गया जी में आयोजित पितृपक्ष मेला 2026 के शांतिपूर्ण समापन के बाद पूर्व मध्य रेल के पंडित दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) मंडल ने आधिकारिक आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, 26 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक चले इस 15 दिवसीय महामेले के दौरान गया जंक्शन से 11 लाख 78 हजार से अधिक यात्रियों ने सफल और सुरक्षित यात्रा की है। महाप्रबंधक डिम्पी गर्ग और मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) उदय सिंह मीना के नेतृत्व में रेलवे ने देश-विदेश से आए इन लाखों श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा, चिकित्सा और आवागमन का एक ऐसा बेहतरीन और सुव्यवस्थित मॉडल पेश किया, जिसकी हर ओर सराहना हो रही है।
रिकॉर्ड जनसमूह और ट्रेनों का सफल परिचालन

रेलवे द्वारा जारी किए गए आंकड़ों पर गौर करें तो इस मेला अवधि में प्रतिदिन औसतन 78,540 यात्रियों ने गया जंक्शन से सफर किया। भीड़ का सबसे बड़ा दबाव 5 अक्टूबर को देखा गया, जब एक ही दिन में 94,734 यात्रियों का आवागमन दर्ज हुआ। इस भारी जनसमूह को उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए डीडीयू मंडल ने 15 दिनों के भीतर कुल 1,726 कोचिंग ट्रेनों का बेदाग परिचालन सुनिश्चित किया। इनमें गया जंक्शन से खुलने वाली 436, यहां समाप्त होने वाली 441 और 849 पासिंग ट्रेनें शामिल रहीं। इसके अतिरिक्त दो स्पेशल ट्रेनों और परिवर्तित मार्ग से चलने वाली ट्रेनों ने भी यात्रियों को बड़ी राहत पहुंचाई, वहीं अनुग्रह नारायण रोड स्टेशन पर भी पांच जोड़ी ट्रेनों का अस्थाई ठहराव दिया गया।
हाई-टेक टिकटिंग और जर्मन टेंट वाले होल्डिंग एरिया

लाखों की भीड़ होने के बावजूद किसी भी श्रद्धालु को टिकट के लिए परेशान नहीं होना पड़ा। स्टेशन पर 5 आरक्षित और 10 अनारक्षित काउंटर चौबीसों घंटे चालू रखे गए, साथ ही 7 स्वचालित टिकट वेंडिंग मशीनें और मोबाइल टिकटिंग की सुविधा से यात्रियों को बड़ी सहूलियत मिली। विष्णुपद मंदिर और रामसागर तालाब के पास भी रेलवे ने विशेष मोबाइल काउंटर संचालित किए। यात्रियों के विश्राम के लिए स्टेशन परिसर में 3,625 वर्गमीटर क्षेत्र में जर्मन टेंट आधारित 5 विशाल होल्डिंग एरिया बनाए गए थे, जहां एक साथ पांच हजार लोगों के बैठने की क्षमता थी। इन क्षेत्रों में पेयजल, शौचालय, पूछताछ केंद्र और निरंतर उद्घोषणा की सुविधा थी, जिसका लाभ मेले के दौरान करीब एक लाख पिंडदानियों ने उठाया।
कड़ी सुरक्षा, चिकित्सा और अधिकारियों की जमीनी निगरानी

लाखों यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए 256 आरपीएफ जवान, 150 जीआरपी कर्मी और 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों का मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार किया गया था। व्यवस्थित भीड़ प्रबंधन के लिए प्लेटफॉर्म टिकटों की बिक्री अस्थाई रूप से बंद रखी गई। वहीं, प्लेटफॉर्म संख्या 1 पर स्थापित चौबीसों घंटे सक्रिय चिकित्सा बूथ में डॉक्टर, स्वास्थ्य सहायक और एम्बुलेंस हर वक्त मुस्तैद रहे। बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए 30 विशेष व्हीलचेयर उपलब्ध कराए गए। स्टेशन को चकाचक रखने के लिए 60 अतिरिक्त सफाईकर्मी तैनात किए गए थे। सबसे अहम बात यह रही कि डीआरएम उदय सिंह मीना सहित तमाम आला अधिकारियों ने मेला अवधि के दौरान स्वयं जमीनी स्तर पर उतरकर पिंडदानियों से सीधा संवाद किया और रेल सुविधाओं पर फीडबैक लिया, जिसने रेलवे और आम जनता के बीच एक सकारात्मक भरोसा कायम किया।







