बिहार की राजधानी पटना में साइबर पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय संगठित अपराध का पर्दाफाश करते हुए 10 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह कुख्यात जामताड़ा गैंग के लिए एक ‘साइबर बैंक’ की तरह काम कर रहा था, जिसका मुख्य उद्देश्य देश भर में की गई साइबर ठगी के पैसों को सुरक्षित तरीके से ठिकाने लगाना था। पुलिस ने अगमकुआं थाना क्षेत्र के शीतलानगर नहर रोड स्थित एक मकान में गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर इस बड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया है। पुलिस के लिए यह एक बड़ी कामयाबी है क्योंकि राज्य में पहली बार इन अपराधियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 111(4) के तहत संगठित अपराध की सख्त प्राथमिकी दर्ज की गई है।
20 प्रतिशत कमीशन पर चलता था काले धन का सिंडिकेट जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस पूरे गोरखधंधे की कमान जामताड़ा में बैठे मास्टरमाइंड जुबैर और अल्ताफ के हाथों में थी। यह गिरोह बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और झारखंड जैसे राज्यों से भोले-भाले ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और रोजगार का झांसा देकर पटना लाता था। इसके बाद उनके पहचान पत्रों और दस्तावेजों में फर्जी तरीके से पता बदलकर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। अपराधी इन खातों का पासबुक, एटीएम और चेकबुक अपने पास रख लेते थे और खाते की डिजिटल जानकारी जामताड़ा भेज देते थे। जैसे ही ठगी की रकम इन खातों में आती, ये शातिर उसे निकालकर अपना 20 प्रतिशत कमीशन काटते और बाकी नकद राशि सरगना तक पहुंचा देते थे। इस काम में एक कूरियर कंपनी का डिलीवरी बॉय भी शामिल था, जो महज 500 रुपये के लालच में बैंक से आने वाली ग्राहकों की वेलकम किट सीधे अपराधियों के हवाले कर देता था।
जेल की सलाखों के पीछे रची गई थी क्राइम की स्क्रिप्ट इस अंतरराज्यीय गिरोह का मुख्य सरगना राहुल कुमार है, जो पूर्व में हरियाणा पुलिस द्वारा गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है। जेल प्रवास के दौरान ही उसकी मुलाकात नई दिल्ली के रहने वाले कुलदीप सिंह से हुई थी, जिसके बाद दोनों ने मिलकर इस हाई-टेक क्राइम सिंडिकेट की नींव रखी और पटना के अगमकुआं में एक फ्लैट किराये पर लेकर अपना कंट्रोल रूम बना लिया। पुलिस की छापेमारी में इनके पास से भारी मात्रा में संदिग्ध सामग्री मिली है, जिसमें 2.86 लाख रुपये नकद, एक लैपटॉप, 38 स्मार्टफोन, 89 एटीएम कार्ड, 76 पासबुक, 82 चेकबुक और कई सिम कार्ड बरामद हुए हैं। इस पूरे रैकेट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनके द्वारा संचालित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के महज एक खाते पर देश भर से 341 साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज थीं। इस गिरोह में महिलाओं की भी सक्रिय भूमिका सामने आई है, जो आम लोगों को अपने विश्वास में लेकर बैंक तक लाने का काम करती थीं।







