Join NowTelegram & WhatsApp Group

महाराष्ट्र जैसा राजनैतिक संकट उत्पन्न हुआ तो क्या होगा बिहार का राजनीतिक समीकरण ?

वरीय संवाददाता देवब्रत मंडल

महाराष्ट्र में उद्धव सरकार का संकट अभी टला नहीं है। यहां बिहार में ओबैसी की पार्टी AIMIM के चार विधायक के राजद में शामिल होने पर राजद बिहार की विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी के रूप और मजबूत बन जाएगी। वर्तमान में राजद के विधायकों की संख्या 76 है। अनंत सिंह को न्यायालय द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद उनकी सदस्यता अभी खत्म नहीं हुई है। लेकिन आगे के दिनों में ऐसा हो भी जाए तो राजद के विधायकों की संख्या 75 रह जायेगी। इस हिसाब से AIMIM के चार विधायकों के शामिल हो जाने पर राजद के पास 79 विधायक हो जाएंगे। बिहार में जातीय जनगणना को लेकर जदयू और राजद एक साथ हैं। महाराष्ट्र में अब फ्लोर टेस्ट की बात हो रही है। महाराष्ट्र में जितने बार फ्लोर टेस्ट हुए हैं, उसमें सरकार बहुमत सिद्ध कर अपनी सरकार को बचा लिया है। ये अलग बात है कि ताजा हालात क्या होंगे ये तो शिंदे समर्थक और उद्धव समर्थक तय करेंगे कि फ्लोर टेस्ट में किसके पक्ष में फैसला आता है। यदि बात बिहार की करें तो ओबैसी की पार्टी AIMIM के चार विधायकों को यदि बिहार विधानसभा अध्यक्ष राजद की सदस्यता को स्वीकृति प्रदान करते हैं तो बिहार विधानसभा में राजद एक बार फिर बड़ी पार्टी के रूप में ही रहेगी। बिहार में सरकार बनाने के लिए किसी भी गुट को 122 से अधिक(कम से कम एक) यानी 123 विधायकों के समर्थन के साथ बहुमत साबित करना होता है। वर्तमान में भाजपा+जदयू+हम की सरकार बहुमत के आधार पर कायम है।

यदि सियासी घटनाक्रम बदलता है तो वर्तमान सरकार पर महाराष्ट्र जैसे राजनीतिक संकट पैदा होने के आसार बढ़ जाएंगे। कहा जाता है कि राजनीतिक में कोई किसी का स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता। नीतीश कुमार राजद के साथ सरकार बना चुके हैं। हालांकि निकट भविष्य ऐसा कुछ होने को नहीं है, लेकिन राजनीति में कब क्या हो जाए, यह कहना बड़ा मुश्किल है। वर्तमान जदयू के कोटे से केंद्र में इस्पात मंत्री के पद पर रामचन्द्र प्रसाद सिंह हैं। जिनकी राज्यसभा की सदस्यता अगले महीने पूरी हो रही है। जिन्हें आरसीपी सिंह के नाम से ज्यादा लोग जानते हैं, उन्हें जदयू ने राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित नहीं किया। इसके बाद से वे फिलहाल एक अलग राग मीडिया के सामने अलाप रहे हैं। जदयू में उनकी क्या और कितनी पैठ है ये तो समय तय करेगा या फिर किसी नए दल का दामन थाम लेंगे या फिर जदयू में ही तटस्थ रहकर पार्टी में ही कुछ नया प्रयोग करेंगे। ये तो समय आने पर साफ होगा, लेकिन जदयू से इनका मोहभंग हो चुका है जैसा ही दिखाई देता है। बिहार में राजद और जदयू की राजनीतिक दोस्ती और दुश्मनी समय देख कर बदलती रहती है। ऐसे में तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाली महागठबंधन का अगला कदम क्या हो सकता है उस पर शेष सभी दलों के वरिष्ठ नेताओं की नजर रहेगी। राजनीति संभावनाओं का खेल है। यदि दूरियां नजदीकियां में नजदीकियां दूरी में बदलती है तो बिहार में सियासी संकट न उत्पन्न हो जाए। जैसा कि विपक्ष के लोग हमेशा ताक में लगे रहते हैं।