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देवब्रत मंडल

डीएम ने बीटीएमसी की उपलब्धियों पर विस्तार से डाला प्रकाश, अच्छी झांकी के लिए राज्यपाल ने किया पुरस्कृत

बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा आयोजित 2568 वां बुद्ध जयंती समारोह महाबोधि मंदिर में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुबह से ही उल्लास का माहौल था। 80 फ़ीट टेम्पल से शांति जुलूस कार्यक्रम शुरू हुआ जो सुबह 7 बजे महात्मा बुद्ध की प्रतिमा और महाबोधि महाविहार मंदिर के परिसर में बोधि वृक्ष की छाया में समापन हुआ। शांति जुलूस का उद्घाटन बीटीएमसी की सचिव डॉ. महाश्वेता महारथी, महाबोधि महाविहार के मुख्य भिक्षु चालिंदा, भिक्षु ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। एन. तेनजिंग ग्याल्त्सो, अध्यक्ष और भिक्खु प्रजनादीप, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिषद के सचिव और नामधारी संगत, झारखंड से हरनाम सिंह नामधारी, स्कूली बच्चों के साथ बौद्ध भिक्षुओं, लामाओं, भिक्षुणियों के साथ कई सुंदर झांकियों के साथ एक भव्य एवं आकर्षक जुलूस निकाला गया। इसके पश्चात बुद्ध जयंती समारोह सुबह 8:30 बजे महाबोधि महाविहार मंदिर के परिसर में पवित्र बोधिवृक्ष की छांव में आयोजित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर थे। जिन्होंने मुख्य गर्भगृह में जाकर पूजा अर्चना एव प्रार्थना की और महात्मा बुद्ध की प्रतिमा को वस्त्र, फूल, धूप और खीर अर्पित की गई इस अवसर पर मुख्य भिक्षु और महाबोधि महाविहार के अन्य भिक्षुओं ने पवित्र सूत्रों का जाप किया।

राज्यपाल, सम्मानित अतिथि थाई कॉउंसिल जनरल कोलकाता इस वर्ष के बुद्ध जयंती समारोह के अवसर पर औपचारिक दीप प्रज्ज्वलित कर 2568 वें बुद्ध जयंती समारोह का उद्घाटन किया। महाबोधि महाविहार के मुख्य भिक्षु भिक्खु चालिंदा ने थेरवाद भिक्षुओं और महायान लामाओं द्वारा मंत्रोच्चार के बाद पांच उपदेश दिए।
डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम-सह-अध्यक्ष बीटीएमसी ने शुभ अवसर पर विशिष्ट सभा का अभिनंदन और स्वागत किया और पिछले दो वर्षों यानी 2022-24 में बीटीएमसी द्वारा की गई उपलब्धियों और विकास पर एक संक्षिप्त जानकारी भी दी। उन्होंने राज्यपाल सहित अन्य देशों से आये श्रद्धालुओं को बताया कि पिछले दो वर्षों में महाबोधि मंदिर एवं बीटीएमसी का काफी तीव्रता से विकास एवं सौंदर्यकरण का कार्य करवाया गया है। पिछले वर्ष लगभग 10 करोड रुपए की लागत से नवनिर्मित बीटीएमसी भवन का उद्घाटन भी हुआ है। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 180 किलोवाट पावर क्षमता वाले सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना की गई है, जिससे महाबोधि मंदिर के साथ-साथ बीटीएमसी कार्यालय द्वारा भी बिजली खपत को रोकते हुए सौर ऊर्जा की ओर डायवर्ट हो रहा है यह काफी सराहनीय पहल है।
इसके अलावा महाबोधि मंदिर में चढ़ने वाले भारी मात्रा में फूलों को रीसाइक्लिंग कर अगरबत्ती तथा अन्य सुगंधित प्रोडक्ट्स को बनाने के लिए कानपुर आईआईटी की कंपनी फुल डॉट को के साथ एमओयू कराया गया है जो कि वर्तमान समय में काफी अच्छा फलाफल प्राप्त हो रहा है।


महाबोधि मंदिर में आने वाले बुजुर्ग एवं दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए रैंप का विस्तारीकरण का कार्य करवाया गया है। बाहरी परिक्रमा की पश्चिम दीवार पर महाबोधि मंदिर के विकास को दर्शाने वाले संबोधि वंदना स्टोन पैनल का निर्माण करवाया गया है। उन्होंने बताया कि संध्याकालीन एवं रात्रि में महाबोधि मंदिर और भव्य एवं आकर्षक दिखे इस उद्देश्य से मंदिर परिसर के अंदर स्थाई प्रकाश की व्यवस्था विद्युत बुनियादी ढांचा प्रणाली के तहत किया गया है। इन आकर्षक लाइट लगने के कारण महाबोधि मंदिर रात्रि में और आकर्षक दिखती है। महाबोधि मंदिर प्रवेश के दौरान अलंकृत पीपल गेट का निर्माण करवाया गया है जो पूरी तरह पीतल का गेट है इससे बाहरी दीवार के स्वरूप बनी रेलिंग की शोभा को और बढ़ता है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 में एक पुराने पीपल के पेड़ की शाखाएं गिरने के कारण मंदिर के मध्य घेरे स्थित स्मृति चैत्य एवं स्तुपा क्षतिग्रस्त हो गए थे जिन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की देखरेख में उन्हें मरम्मत करवा कर एक नया स्वरूप देने का कार्य किया गया है। महाबोधि मंदिर के स्वर्ण शिखर का रखरखाव एवं सफाई करवाया गया है। इसके अलावा मुचलिन्द सरोवर में जल शोधन यंत्र लगाकर तालाब की साफ सफाई सुनिश्चित कराई जा रही है। मंदिर के गर्भ गृह के अंदर बारीक पच्चीकारी से अंकित बौद्ध ग्रंथ वाले विशेष रूप से डिजाइन किए गए झूमर की स्थापना की गई है। इसके अलावा वर्ष 2023 में बोधगया मंदिर प्रबंधककारिणी समिति द्वारा तीन मूल्यवान पुस्तक का प्रकाशन करवाया गया है। जिनमें पवित्र बौद्धिक वृक्ष, महाबोधि महाविहार के स्मारक एवं बुद्ध की कथा नामक पुस्तक शामिल है। इसके अलावा हर वर्ष प्रज्ञा नामक पुस्तक का भी प्रकाशन करवाया जाता है। PRAJNA-2024 का वार्षिक द्विभाषी अंक और ‘महाबोधि महाविहार – दिव्य परमानंद और निर्वाण आनंद का एक विश्व विरासत स्थल-बदलते समय के साथ तालमेल बनाए रखना’ नामक कॉफी टेबल बुक का विमोचन बिहार के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर द्वारा किया गया।
वक्ताओं में वेन. एन. तेनजिंग ग्याल्त्सो, अध्यक्ष और भिक्खु प्रजनादीप, महासचिव, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिषद, बुद्धगया, डाव उप्पलवन्ना – म्यांमार से महासद्दम्मजोतिकाधजा, इस वर्ष के बुद्ध जयंती समारोह के प्रायोजक, फुकेत, थाईलैंड से सुश्री पापाचसोर्न मीपा ने इस अवसर पर इसके महत्व पर प्रकाश डाला। बुद्ध पूर्णिमा और बुद्ध के जीवन और शिक्षाओं पर विशेष रूप से बताया है। नामधारी संगत, झारखंड के हरनाम सिंह नामधारी ने भी इस अवसर पर संक्षेप में बात रखी है और बुद्ध जयंती समारोह में हमेशा भाग लेने की अनुमति दिए जाने के लिए आभारी थे। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर आए अतिथि, कोलकाता में थाईलैंड की महावाणिज्य दूत, सुश्री सिरीपोर्न तांतीपन्याथेप ने भी इस अवसर पर बात की और बोधगया के प्रति थाईलैंड के लोगों की भक्ति और थाईलैंड और भारत के बीच मजबूत बंधन का विशेष उल्लेख किया है।
आज के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने अपने भाषण में मार्च, 2024 में बैंकॉक, थाईलैंड की अपनी यात्रा का विशेष उल्लेख किया, जिसमें वे बुद्ध के पवित्र अवशेषों के साथ गए थे। उन्होंने थाईलैंड के लोगों के प्रति अपनी प्रशंसा व्यक्त की कि उन्होंने कितनी निष्ठा से बुद्ध के पवित्र अवशेषों का सम्मान किया और उन्हें अपने देश में प्राप्त किया। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि प्रेम, करुणा और शांति की बुद्ध की शिक्षाओं का पालन करना महत्वपूर्ण है। भारत युद्ध का आह्वान नहीं करता बल्कि धम्म का प्रचार करता है। (शस्त्र नहीं शास्त्र) भारत युद्ध का प्रचार नहीं करता बल्कि बुद्ध की शिक्षाओं का प्रचार करता है। उन्होंने इस वर्ष के बुद्ध जयंती समारोह में भाग लेने के लिए बोधगया आये देशी-विदेशी श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। बीटीएमसी की ओर से, गया के जिला पदाधिकारी-सह-बीटीएमसी के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने बिहार की राज्यपाल एव कोलकाता से आये थाईलैंड की महावाणिज्य दूत को स्मृति चिन्ह भेंट किए।  थाईलैंड की महावाणिज्य दूत ने भी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किया। सर्वश्रेष्ठ झांकी के लिए बिहार के राज्यपाल द्वारा ट्राफियां भी प्रदान की गईं। पहला पुरस्कार वियतनाम मंदिर को, दूसरा पुरस्कार रॉयल थाई मंदिर को और तीसरा पुरस्कार म्यांमार बर्मी मंदिर को दिया गया। बीटीएमसी की सचिव डॉ. महाश्वेता महारथी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। बोधि वृक्ष के नीचे समारोह संपन्न होने के बाद, बिहार के माननीय राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, जिला पदाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक के साथ उन्होंने बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति के नए भव्य आकर्षक रूप में बने कार्यालय भवन का जाकर देखा और अपनी प्रशंसा व्यक्त किया है।

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Last Update: May 23, 2024