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देवब्रत मंडल

मुंगेर लोक सभा अपडेट:(एक व्हाट्सएप ग्रुप से) मुंगेर के रण में अशोक महतो की एंट्री बहुत बाद में हुई. ललन सिंह को तो लड़ना ही था. लेकिन, एक तीसरा भी यहां पिछले कई साल से मेहनत कर रहा था. नाम- प्रियदर्शी पीयूष. जाति से धानुक. मुंबई से पढ़ा-लिखा. वापस आया, तो मुंगेर में जनता के मुद्दों को लड़ने लगा. अतिपिछड़ों की विशेष चिंता. और चुनाव में न ललन सिंह की फिक्र की, न अशोक महतो से डरा. साफ-सुथरी बातें करता रहा.
आज चुनाव प्रचार का अंतिम दिन है मुंगेर में और सबसे अधिक चिंता धानुक जाति के मतों की है. अशोक महतो का दावा- ये हमारे हो चुके हैं. ललन सिंह कह रहे- ये तो हमारे ही हैं. धानुक के गांव जाइए, वे बताएंगे यादवों की कहानी. गिनती कराएंगे गिरे लाशों की और मोकामा के टाल के जब धानुक बहुल गांवों में जाएंगे, तो निर्दलीय प्रियदर्शी पीयूष का नाम भी सुनेंगे. लोग कहेंगे, समाज का लड़का है, लफड़े से दूर है. मतलब, मुंगेर में धानुक वोट बैंक के भीतर बहुत खेला है.

अब आगे की कहानी: मुंगेर लोकसभा चुनाव क्षेत्र में चुनाव प्रचार का शोर 11 मई की शाम थम जाएगा। 13 को वोट डाले जाएंगे। यहां राजद से अशोक महतो तो जदयू से ललन सिंह हैं लेकिन इन दोनों के बीच समझे जा रहे सीधे मुकाबले में पियूष प्रियदर्शी की उम्मीदवारी ने खलल डाल दी है। अशोक महतो और ललन सिंह के लिए निर्दलीय उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी राह में रोड़े अटका कर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है।

करीब चार लाख हैं धानुक मतदाता: मुंगेर लोकसभा क्षेत्र में धानुक मतदाताओं की संख्या करीब चार लाख के आसपास बताई जा रही है। जो इस बार के चुनाव में एकजुटता के साथ फैसला लिया है कि इस बार न तो जदयू और न ही राजद को वोट करेंगे। करेंगे तो अपने समाज के उम्मीदवार पियूष प्रियदर्शी को।

अनंत सिंह के आने से क्या फर्क पड़ेगा: चुनाव प्रचार से लेकर मतदान तक अनंत सिंह मुंगेर लोकसभा क्षेत्र में ही रहेंगे। जो इन दिनों पैरोल पर जेल से बाहर आए हुए हैं। इससे भाजपा-जदयू के साझा उम्मीदवार ललन सिंह के लिए कितना फायदेमंद होता है ये तो 04 जून को ही पता चल पाएगा। धानुक समाज के लोगों ने यहां एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है और इसमें शामिल लोगों ने दावा किया है कि इस बार धानुक जाति का वोट केवल पीयूष प्रियदर्शी को मिलने जा रहा है। इसके अलावा अन्य पिछड़ी और अनुसूचित जाति के अलावा सामान्य वर्ग के लोग भी साथ दे रहे हैं।

दो बड़ों की लड़ाई में तीसरे को फायदा: यदि धानुक एकजुट होकर अपने निर्णय पर वोट डालने वक्त तक कायम रह जाते हैं तो राजद और जदयू के लिए किसी खतरे से कम नहीं। इस धानुक समाज के रिटायर्ड एसपी रंजीत कुमार सिन्हा, ऋषभ, चंदन सिंह आदि कई ऐसे लोग हैं जो धानुक समाज को एकसूत्र में पिरोए हुए हैं और अंत तक पियूष प्रियदर्शी की जीत के लिए एड़ी चोटी एक कर चुके हैं। वहीं पियूष प्रियदर्शी और इनके चुनाव अभियान में शामिल लोगों का कहना है कि धानुक जाति के लोगों के साथ साथ सभी वर्गों से अच्छा वोट मिलने जा रहा है। इसलिए ललन सिंह और अशोक महतो जिनकी पत्नी(धानुक कही जाने वाली) के बीच हो रही लड़ाई ने पियूष प्रियदर्शी की जीत की राह को और आसान कर दिया है।

ऊंट किस करवट बैठेगा, इस पर सभी की नजर: इस बार मुंगेर लोकसभा चुनाव में ऊंट किस करवट बैठेगा। इस पर भाजपा-जदयू, राजद-कांग्रेस गठबंधन के बड़े बड़े नेताओं की नजर है। एक स्वच्छ छवि के बेदाग निर्दलीय उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के इस लड़ाई में शामिल हो जाने से चुनाव दिलचस्प होता नजर आ रहा है।