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कोरोना के कारण ‘खून’ के लिए संघर्ष , ब्लड नहीं मिलने से थैलेसीमिया पीड़ित 30 बच्चों की जान को खतरा

गया के लगभग सभी ब्लड बैंक में रक्त की कमी से मरीज काफी परेशान हो रहे है। वहीं इस समय कोरोना संक्रमित होने और वैक्सीन लगाने के लिए ब्लड बैंक ब्लड देने से मना कर रहे हैं। ऐसे में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए
कोरोना संकट काल (Corona) ने एक नया संकट खड़ा कर दिया है। ये संकट थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ सकता है। कोरोना के कारण थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को ब्लड (Blood) हासिल करने में भारी दिक्कत हो रही है। खून के बिना इनकी ज़िंदगी खतरे में पड़ गयी है। गया में कोरोना के बाद अब लोगों को अपने बच्चों को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। शहीद भगत सिंह यूथ परिवार के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. ऋषिमुनि कुमार ने बताया कि थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को उम्र के अनुसार 15 दिन से लेकर एक महीने के बीच इन्हें ब्लड (Blood) चढ़ाना होता है , और ब्लड बैंक में ब्लड नहीं हैं। यही नहीं, समय पर ब्लड नहीं मिलने के कारण थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के परिवार वाले बेहद परेशान हैं। वहीं हॉस्पिटल प्रशासन का ध्यान कोरोना संक्रमण को लेकर है लेकिन ब्लड बैंक खाली है।

कुछ लोगो का कहना ये है की कुछ दिन से ब्लड बैंक में ब्लड नहीं होने के कारण परेशान हैं. हमें डोनर भी नहीं मिल रहे हैं. ब्लड बैंक में ब्लड नहीं है परिवार वाले ब्लड नहीं दे रहा है. कोरोना में लंबे समय तक परिवार वालों ने खुद और रिश्तेदारों से ब्लड का इंतजाम किया. अब ऐसा कोई बचा ही नहीं है, जिससे ब्लड ले सकें।।

कहां से लाएं ब्लड

गयाजी नगर में रहने वाले बीरेंद्र जी ने बताया कि उनके बेटे को भी हर 15 दिन में ब्लड चढ़ाना पड़ता है. परिवार, रिश्तेदार और साथियों की मदद से ब्लड की व्यवस्था हो जाती है। लेकिन कोरोना के बाद ब्लड बैंक में ब्लड नहीं मिल रहा है। इसलिए डेढ़ साल से काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है शासन-प्रशासन और सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए ताकि बच्चों को समय पर ब्लड मिल सके।

इसलिए ज़रूरी है ब्लड

थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की उम्र के अनुसार 15 दिन से लेकर एक महीने के बीच इन्हें ब्लड चढ़ाना होता है। इस समय लोग कोरोना संक्रमित होने और वैक्सीन लगाने के लिए ब्लड देने से मना कर रहे हैं। शहर में एक बार ब्लड मिल भी जाता है, लेकिन गांव से आने वाले लोगों को डोनर ढूंढने में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। थैलेसीमिया रोग एक तरह का रक्त विकार है। इसमें बच्चे के शरीर में रेड ब्लड सेल सही तरीके से नहीं बन पाता है, और इन कोशिकाओं की आयु भी बहुत कम हो जाती है। इसकी वजह से बच्चों को एक महीने या उससे कम समय में बाहर से रक्त चढ़ाना पड़ता है।

मगध लाइव न्यूज डेस्क

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Written by Digital Desk

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