Join NowTelegram & WhatsApp Group

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर रेल परियोजना को ससमय पूरा होने में भूमि अधिग्रहण का फंसा है पेंच

वरीय संवाददाता देवब्रत मंडल

भारत सरकार की महत्वाकांक्षी रेल परियोजना ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को ससमय पूरा कर लेने में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने में एक पेंच फंसा नजर आता है। हम बात कर रहे हैं गया जिले की। गया जिले में इस रेल परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया 23 अगस्त 2013 से शुरू हो तो गई। लेकिन इन करीब नौ साल में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी या की जा सकी है। 2013 में गया जिले के 14 मौजा की जमीन के अधिग्रहण की सबसे पहले अधिसूचना अखबारों में प्रकाशित की गई थी। इन 14 मौजों की जमीन से होकर यह नई रेल लाइन होकर गुजरनी है। लेकिन, अबतक एक ऐसा मौजा है, जहां भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपूर्ण कही जा सकती है। इस मौजा का नाम है-कंडी नवादा। इस मौजा के वार्ड नंबर 1 छोटकी नवादा में एक रैयत हैं। जिनका नाम उर्मिला देवी है। उर्मिला देवी की जो जमीन अधिग्रहण के दायरे में आई है, उसका खाता नंबर 7(पुराना), प्लॉट नंबर 565(पुराना) और 572(पुराना) है। इन दोनों प्लॉट में से एक 565 की अधिग्रहित की गई इनकी जमीन करीब 8.13 डिसमिल के मुआवजे की राशि प्राप्त करने के लिए तो नोटिस इनके पुत्र ने प्राप्त कर लिया, पर इन्हें एलपीसी नहीं मिल सका है। कारण कि 2004 के बाद इन्होंने लगान का भुगतान नहीं किया, जैसा कि नगर अंचल कार्यालय से इन्हें बताया गया है। श्री कमलेश कुमार भी यह बात मानते हैं कि 2004 के बाद उन्होंने लगान का भुगतान नहीं किया गया है। वहीं इसी 7 नंबर खाता में कई डेसीमल जमीन का न तो हिस्साकसी हो सका है और न तो इन्हें भूअर्जन कार्यालय से मुआवजे के लिए नोटिस ही निर्गत हुआ। इस बाबत पूछे जाने पर उर्मिला देवी के पुत्र कमलेश कहते हैं कि जब उन्हें पता चला कि उनकी जमीन इस परियोजना के लिए अधिग्रहण की जा रही है तो वे स्थानीय डीएफसीसीआईएल, गया के कार्यालय में आए। 565 का नोटिस प्राप्त कर लिया। इसके बाद डीएफसीसीआईएल, गया के कार्यालय में एक शिविर में उपस्थित हुए। उस दिन अपना grievance संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के समक्ष रख चुके हैं। मुआवजे के लिए नोटिस की मांग करने से संबंधित एक आवेदन गया जिला भूअर्जन पदाधिकारी के कार्यालय में कब के दे चुके हैं। लेकिन अबतक इसका भी निदान नहीं हो सका है। अंचल कार्यालय से इन्हें दस्तावेज को अद्यतन कराने के लिए परिमार्जन का सुझाव दिया गया। ये भी कर चुके हैं। कमलेश कुमार कहते हैं कि आज भी बिहार सरकार के भूमि एवं राजस्व विभाग के पोर्टल पर इनकी मां उर्मिला देवी के नाम से करीब 57 डिसमल जमीन इनके कब्जे में दिखा रहा है। लेकिन परिमार्जन नहीं हो पाने से न तो बकाया लगान का भुगतान कर पा रहे हैं और न ही इन्हें एलपीसी मिल पा रहा है। ऐसे में कमलेश इस बात को लेकर परेशान हैं कि आखिर उनकी अधिग्रहित की जा रही जमीन का मुआवजा भुगतान उनकी माँ को किए बिना कैसे इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना को क्रियान्वित करने की प्रक्रिया के तहत इस मौजा में मकान(स्ट्रक्चर) खाली करने को लोगों को कहा जा रहा है। इस संबंध में कमलेश कुमार का कहना है उनकी माँ के नाम से इस अधिग्रहित की जा रही जमीन के सारे वैध दस्तावेज सुरक्षित उनके पास है। लेकिन कोई पदाधिकारी इस जमीन के मुआवजे की राशि भुगतान करने के लिए उनकी माँ या उन्हें सूचित नहीं कर रहे हैं। ऐसे में स्वाभाविक तौर कहा जा सकता है अभी गया जिले में ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर रेल परियोजना को ससमय पूरा हो पाने में संदेह है। बता दें कि कंडी नवादा मौजा में इस परियोजना के लिए करीब 7.74 एकड़ भूमि अधिग्रहण के दायरे में है।