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निडर, निर्भय, बेखौफ़ बढ़ती हैं बेटियाँ, संघर्ष कर सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ती हैं बेटियाँ: रश्मि प्रियदर्शिनी

जीबीएम कॉलेज में महिला सशक्तीकरण विषय पर कार्यक्रम का हुआ आयोजन

वरीय संवाददाता देवब्रत मंडल

गया के गौतम बुद्ध महिला महाविद्यालय में महिला थाना, गया की ओर से किशोरियों एवं महिलाओं में परिस्थिति-जन्य आत्म-सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने हेतु महिला सशक्तीकरण सभा का आयोजन किया गया, जिसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा(आइएएस) अधिकारी अनुपमा सिंह, भारतीय पुलिस सेवा(आईपीएस) अधिकारी स्वीटी शेरावत, प्रधानाचार्य प्रो डॉ जावेद अशरफ, महिला थानाध्यक्ष-सह-कार्यक्रम की नोडल अधिकारी रवि रंजना, महिला हेल्पलाइन पदाधिकारी आरती कुमारी, बाल कल्याण समिति, गया की सदस्य रेणु कुमारी चौरसिया, रामपुर अंचल के पुलिस निरीक्षक मृत्युंजय कुमार सिंह, डीएवी इंग्लिश स्कूल की प्राचार्य प्रिया, सेंटर डायरेक्ट की जिला समन्वयक माधुरी कृष्णा, एससी/एसटी थानाध्यक्ष मधु कुमारी आदि ने अपने बहुमूल्य विचार रखे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप-प्रज्ज्वलन तथा कार्यक्रम का संचालन कर रही अंग्रेजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर -सह-पीआओ डॉ. कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी द्वारा प्रस्तुत शांति पाठ से हुआ। तत्पश्चात प्रधानाचार्य प्रो. जावेद अशरफ ने उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ प्रदान कर किया।
महिला थानाध्यक्ष रवि रंजना ने कार्यक्रम के आयोजन के पीछे निहित उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए विषय प्रवेश किया। उन्होंने किशोरियों तथा महिलाओं को यात्राओं के दरम्यान ऑटो, बस, होटल तथा लिफ्ट आदि में होने वाले दुर्व्यवहार, दुष्कर्म, अत्याचार तथा अपराधों से स्वयं को सुरक्षित रखने हेतु महत्वपूर्ण टिप्स दिए। आइपीएस ऑफिसर सुश्री स्वीटी शेरावत ने महिलाओं को कमल के समान बने रहकर समाज में फैले कीचड़ से स्वयं को सुरक्षित रखने के उपाय बताए। उन्होंने सोशल मीडिया का सावधानी से प्रयोग करने की बात कही ल। ताकि स्वयं को साइबर अपराधियों के शिकंजे से बचाया जा सके।

उन्होंने कहा कि यदि मोबाइल फोन हमें सशक्त बनाता है, तो वहीं हमें साइबर अपराधों का शिकार भी बना सकता है। अतः मोबाइल, स्मार्टफोन अथवा लैपटॉप का ऑनलाइन प्रयोग करते समय काफी सतर्क रहने की जरूरत है। आईएएस अनुपमा सिंह ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि बतौर मेडिकल छात्रा निर्भया कांड के समय वे भी काफी डर गयी थीं, लेकिन उन्होंने भय को पीछे छोड़ समस्याओं से जूझने की ठान ली और उन्हें सफलता प्राप्त हुई। उन्होंने प्रिवेंशन तथा क्योर दोनों को महिला सुरक्षा हेतु महत्वपूर्ण बताया। आरती कुमारी ने छात्राओं से महिलाओं की सुरक्षा में महिला हेल्पलाइन की भूमिका पर विचार रखे। महिला हेल्पलाइन नंबर साझा करते हुए हर मुसीबत में संभव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया। प्रधानाचार्य प्रो. जावेद अशरफ ने छात्राओं को किसी से भी अपने व्यक्तिगत सीक्रेट्स शेयर नहीं करने की बात कही, क्योंकि दोस्त को दुश्मन बनते देर नहीं लगती। उन्होंने छात्राओं से वाह्टसऐप आदि पर अनावश्यक चैट्स नहीं करने की हिदायत दी। छात्राओं की सुरक्षा में स्कूल/कॉलेज/की भूमिका और दायित्व विषय पर प्रकाश डालते हुए प्रधानाचार्य ने छात्राओं से अपने पैरेंट्स और शिक्षकों के संपर्क में रहने का अनुरोध किया। पुलिस निरीक्षक मृत्युंजय कुमार सिंह ने सभ्यता और संस्कृति पर विचार रखते हुए महिलाओं की सुरक्षा हेतु शिक्षा को आवश्यक शर्त ठहराया। रेणु चौरसिया तथा एससी/एसटी थानाध्यक्ष मधु कुमारी ने भी किशोरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक सुझाव दिए। संवाद-सत्र के समय छात्राओं ने भी आईएएस/आईपीएस अधिकारियों से प्रश्न तथा समस्या के समाधान पूछे। कार्यक्रम का समापन डॉ कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी द्वारा कार्यक्रम-सार प्रस्तुतीकरण तथा धन्यवाद ज्ञापन द्वारा हुआ। उन्होंने कहा कि इस तरह के महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम वास्तव में सफल तभी कहे जाएंगे, जब छात्राएँ तथा महिलाएँ परिवार तथा समाज में अपने साथ घटित होने वाली किसी भी तरह की शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक प्रताड़ना/दुर्व्यवहार का खुलकर विरोध करने में स्वयं को सक्षम महसूस करने लगें। डॉ रश्मि ने अपनी स्वरचित कविता की पंक्तियाँ “..निडर, निर्भय, बेखौफ़ बढ़ती हैं बेटियाँ, संघर्ष कर सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ती हैं बेटियाँ” तथा अंग्रेजी के प्रसिद्ध कथन “शिप्स आर सेफेस्ट इन हार्बर, बट दैट इज नॉट द प्लेस दे आर मेड फॉर” को उद्धृत करते हुए कहा कि भले ही बाहर बहेलिये का डर हो, इसका अर्थ यह नहीं कि हम उड़ना ही छोड़ दें। जहाज समुद्र की लहरों पर चलने के लिए बने होते हैं न कि बंदरगाहों पर खड़े रहने के लिए। परंतु तूफानों एवं झंझावातों से सतर्क तथा सुरक्षित रहना भी आवश्यक है। हम महिलाओं को भी सतर्क तथा सावधान रहने की जरूरत है। आवश्यकता पड़ने पर संकोच को पीछे छोड़ पुलिस तथा प्रशासन का सहयोग लेने की आवश्यकता है। घर, परिवार, पुलिस, प्रशासन, सरकार, शिक्षण-संस्थानों तथा पूरे समाज को महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों को रोकने हेतु एकजुट होने की जरूरत है। डॉ रश्मि ने प्रधानाचार्य प्रो जावेद अशरफ तथा समस्त महाविद्यालय परिवार की ओर से सभी अतिथि वक्ताओं विशेष रूप से कार्यक्रम की आयोजक महिला थानाध्यक्ष रवि रंजना तथा सभी मीडिया-अधिकारियों के प्रति हार्दिक कृतज्ञता जताई।
कार्यक्रम में प्रो. अफ्शाँ सुरैया, डॉ. नूतन कुमारी, डॉ निर्मला कुमारी, डॉ. सहदेव बाउरी, डॉ. शगुफ्ता अंसारी, डॉ. पूजा, डॉ. पूजा राय, डॉ. अमृता घोष, डॉ. अनामिका कुमारी, डॉ. प्रियंका कुमारी, डॉ. फरहीन वजीरी, प्रीति शेखर, कृति सिंह आनंद, नीरज कुमार अभिषेक कुमार, अर्पणा कुमारी सहित रिया, मोनिका, प्रतिज्ञा, तान्या सहित कई छात्राओं की उपस्थिति रही।

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Written by Digital Desk

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