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भाकपा माले ने गया जिला पार्टी कार्यालय में मनाया काला दिवस, रखी अपनी मांगें

वरीय संवाददाता देवब्रत मंडल

भाकपा माले जिला सचिव निरंजन कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री कोरोना संकट को अवसर में बदलने का नारा देकर लाभ वाली सरकारी संस्थानों का निजीकरण किया और फिर खेती को भी निजी हाथों में गिरवी रख देने की योजना के तहत ही केंद्र सरकार ने तीनों कृषि काला कानून लाई है। जिसका बिरोध देश के किसान पिछले 6 माह से कर रहे हैं। किंतु इनकी माँगो पर ध्यान देने व वार्ता कर समाधान करने बजाय केंद्र सरकार नाकारात्मक रवैया अपनाए हुए है। उन्होंने मांग की है कि A2 FL नही, C2 के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए।
बिहार में 2006 से बंद APMC मंडियों को पुनः बहाल कर खरीद शुरू करने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य में शामिल कुल 23 फसलों के साथ गन्ना,आलू, प्याज, दुग्ध, मछली को भी शामिल करने की मांग की।
प्रदर्शन में शामिल ऐपवा नेत्री रीता वरणवाल ने बटाईदार किसानों को पहचान पत्र देते हुए सरकारी सहायता प्रदान करने, लॉकडाउन के कारण फल-सब्जी उत्पादों का कोई खरिददार नही मिलने के कारण सब्जी-फल उत्पादकों को मुआवजे की गारंटी देने की मांग की। कार्यक्रम में कई नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे।