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फतेहपुर प्रखंड के धनगांव विद्यालय में जिंदगी और मौत के बीच शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं बच्चे

रिपोर्ट – समर राठौर,फतेहपुर

जर्जर भवन की छत

शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए केंद्र से लेकर राज्य की सरकारें एड़ी चोटी को जोर लगा रही हैैं। इसके बावजूद सरकारी स्कूलों की स्थिति दयनीय बनी है। हालात यह है कि बुनियादी सुविधाएं तक स्कूलों से नदारद हैं। गया जिले के फतेहपुर प्रखंड के धनगांव प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को शिक्षा जिंदगी और मौत के बीच में दी जा रही है। यहां की जर्जर भवन कब बच्चों के साथ अनहोनी घटना के लिए जिम्मेवार बन जाए कोई नहीं जानता। जर्जर भवन के नीचे, शिक्षक भी अपनी मौत को दांव पर लगाकर बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। यहां के प्रभारी प्रधानाध्यापक से जब इस मामले पर बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि यहां 158 बच्चों का नामांकन है और 3 शिक्षक कार्यरत हैं। जर्जर भवन के बारे में कई बार हमने जिला शिक्षा पदाधिकारी को अवगत कराया है। वहीं शिक्षक संघ के अध्यक्ष रवि शंकर कुमार ने बताया कि मेरे द्वारा जिला के कई अधिकारियों को इस मामले से अवगत कराया गया लेकिन आज तक भवन नहीं बन सका। करीब 2 महीने पहले फतेहपुर क्षेत्र के ढूब्बा गांव में सरकारी विद्यालय का जर्जर भवन गिरने से दो लोगों की मौत हो गई थी , उसके बावजूद पुराने जर्जर भवन को निष्क्रिय नहीं किया गया। अगर धनगांव प्राथमिक विद्यालय में नया भवन नहीं बना तो आने वाले दिनों में ढूब्बा सरकारी विद्यालय जैसी घटना यहां भी हो सकती है।
वही ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्कूल का जर्जर भवन रहने के कारण कई गांव वाले के बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ने जाते हैं।, क्योंकि यहां जर्जर भवन के नीचे बच्चों को पढ़ाया जाता है। इसलिए यहां के अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी विद्यालय में नहीं भेजते हैं।

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Written by DIGITAL DESK

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